आंदोलन से खलबली, सरकार करा रही सर्वे!

 

सोशल मीडिया पर बेकार तर्क-कुतर्क से खफा है भाजपा का शीर्ष नेत्तृत्व

(लिमटी खरे)

सिवनी (साई)। हाल ही में बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच अब भाजपा के शीर्ष नेत्तृत्व की नींद उड़ गयी है। एक के बाद एक कल्याणकारी योजनाओं के बाद भी सरकार के खिलाफ उबल रहे जनाक्रोश के शमन के लिये भाजपा के आला नेताओं ने सर्वेक्षण का सहारा लिया है, ताकि यह पता किया जा सके कि इस तरह के आंदोलन से भाजपा को कितना नुकसान हो सकता है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तर के एक नेता ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एससी – एसटी एक्ट के विरोध में हुए आंदोलन का आने वाले चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है। उक्त नेता का कहना था कि एससी – एसटी एक्ट चूँकि केंद्र का मसला है इसलिये इसका ज्यादा असर प्रदेश के चुनावों पर शायद ही पड़े, किन्तु भाजपा के जिला स्तरीय नेता इस बात को जनता को समझाने में नाकाम ही रहे हैं।

उक्त नेता का कहना था कि शिवराज सिंह चौहान के द्वारा एक के बाद एक जन कल्याणकारी योजनाओं के लागू किये जाने के बाद भी जनता अगर असंतुष्ट है तो इससे आला नेताओं की नींद उड़ी हुई है। जिलों से यह फीडबैक भी बुलवाया जा रहा है कि आखिर जनता के नाराज रहने का कारण क्या है।

इधर, मुख्य सचिव कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि प्रदेश भर में कमोबेश हर जिले में बेलगाम होती अफसशाही से जनता बुरी तरह त्रस्त है। सरकार की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों को नहीं मिल पा रहा है। अधिकारी अपने हिसाब से बंदरबांट कर योजनाओं को लागू कर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि प्रदेश में संबल योजना का लाभ जनता को मिलता और इससे आम जनता शिवराज सिंह चौहान की ओर आकर्षित होती किन्तु इसी बीच एससी – एसटी एक्ट का मसला आ गया और अगड़ों का आक्रोश फट पड़ा। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर इस आक्रोश के फटने का कारण क्या हो सकता है, जबकि प्रदेश में लोगों के लिये अनेक योजनाएं संचालित हैं।

मुख्यमंत्री निवास के सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल डीजल के दामों में लगी आग से भी सरकार के आला नेता चिंतित हैं। इस बारे में यह समझाने का असफल प्रयास किया जा रहा है कि यह मुद्दा भी केंद्र से जुड़ा है। सूत्रों ने कहा कि अगर जनता के सामने यह मुद्दा उछाल दिया गया कि प्रदेश सरकार पेट्रोल – डीजल पर लगाये गये कर के अलावा चार रूपये प्रति लीटर अतिरिक्त ले रही है तो इससे काफी हद तक नुकसान हो सकता है।

उधर, भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश ईकाई से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सोशल मीडिया पर भाजपा के नेताओं के द्वारा लगातार अनर्गल प्रलाप से संगठन मंत्री सुहास भगत और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह बहुत ही नाराज चल रहे हैं। जल्द ही इसके लिये एडवाईजरी भी जारी हो सकती है।

सूत्रों ने बताया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के द्वारा हाल ही में दो संभागों की बैठक में इस बात पर नाराजगी व्यक्त की गयी है कि भाजपा के जिला स्तर के प्रवक्ता तो सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय नहीं हैं, उनके अलावा कुछ नेता जबरन ही प्रवक्ता बनते हुए मनमाने तरीके से बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह के लोगों को सावधान करते हुए कहा कि अगर उनकी हरकतों से पार्टी की छवि पर प्रभाव पड़ा तो वे अनुशासन की कार्यवाही के दायरे में आ सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि भाजपा का संगठन अब चौथी बार सरकार बनाने में किसी तरह की रिस्क मोल नहीं लेना चाहता है। संभवतः यही कारण है कि चुनाव के पहले अब भाजपा के आला नेताओं के द्वारा सोशल मीडिया पर बारीक नजर रखना आरंभ कर दिया गया है। इसके लिये सोशल मीडिया के एक्सपर्ट्स की भी मदद ली जा रही है।

सूत्रों ने कहा कि जिला स्तर पर संगठन के प्रमुखों को जल्द ही इस तरह के दिशा निर्देश जारी हो सकते हैं, जिनमें भाजपा के जिला प्रवक्ताओं और आईटी सेल को ही भाजपा पर लगे आरोपों के जवाब के लिये आगे लाने की बात कही जा सकती है। फिलहाल भाजपा के जिस भी नेता का मन हो रहा है वह अपने हिसाब से बयानबाजी कर रहा है, जिसे भाजपा का शीर्ष नेत्तृत्व गंभीरता से ले रहा है।

 

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