धुंआ उगलते वाहन कर रहे लोगों को बीमार

 

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शहर की सड़कों पर बेहिसाब धुंआ फेंकने वाले वाहनों की संख्या दिन – प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वाहनों से निकलने वाले धुंए से प्रदूषण बढ़ रहा है साथ ही अन्य वाहन चालकों और सड़क से सटे व्यवसायियों के लिये बड़ी परेशानी का सबब बन रहे हैं।

परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण शहर के अलावा जिले में कंडम वाहन दौड़ रहे हैं जो सड़कों पर धुंआ फैला रहे हैं। आधुनिक फिटनेस सेंटर न होने के कारण अभी तक केवल प्रमाण पत्र देखकर वाहन मालिक को सर्टिफिकेट जारी किया जाता रहा है। परिवहन विभाग के नगझर स्थित कार्यालय में प्रदूषण और फिटनेस की जाँच के लिये किसी तरह की माकूल व्यवस्थाएं न होने से इस तरह के वाहन बिना खौफ ही सड़कों का सीना रौंद रहे हैं।

वर्तमान में कई कंडम वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिन्हें परिवहन विभाग ने फिटनेस सर्टिफिकेट दिया है। ऐसी स्थिति में वाहनों की वजह से बढ़ने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण की उम्मीद नहीं की जा सकती है। अनेक पुराने वाहनों से धुंआ इस तरह निकलता दिखता है मानो उनमें आग लग गयी हो।

ज्ञातव्य है कि प्रदेश शासन के परिवहन विभाग की ओर से वर्ष 2016 के नवंबर माह में एक आदेश जारी किया गया था। आदेश में साफ तौर पर लिखा हुआ था कि इसके लिये विशेष जाँच अभियान चलाया जाये। जाँच में वाहनों के अंदर लगाये गये गति नियंत्रक उपकरणों की चैकिंग के साथ ही प्रदूषण प्रमाण पत्रों की भी कड़ाई से जाँच की जाये ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगायी जा सके।

विडम्बना ही कही जायेगी कि दो साल बीतने के बाद भी जिले के परिवहन विभाग के द्वारा अब तक जिले में वाहनों की चैकिंग के लिये किसी तरह अभियान नहीं चलाया गया है। और तो और जिले में प्रेशर हॉर्न वाले दो एवं चार पहिया वाहनों के साथ ही साथ भारी वाहन भी बेखटके ही सड़कों का सीना रौंद रहे हैं।

रात के स्याह अंधेरे और सन्नाटे में मॉडीफाईड साईलेंसर्स की कर्कश आवाज और गोली जैसी दनादन आवाजें निकालने वाले साईलेंसर्स से लोगों की नींद में खलल पड़ता है। आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि बाहुबली चौराहे, पुलिस कंट्रोल रूम, कोतवाली, शुक्रवारी में एसडीओपी कार्यालय के आसपास, बस स्टैण्ड, भैरोगंज आदि क्षेत्रों में रात 11 बजे से 01 बजे के बीच इस तरह की डरावनी आवाजें निकालते दो पहिया वाहन बेखौफ घूमते नजर आते हैं लेकिन इन वाहनों पर पुलिस की नजरें न पड़ना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा, क्योंकि चौक चौराहों पर लगे शक्तिशाली सीसीटीवी कैमरों से वाहन का नंबर निकालना दुष्कर कार्य शायद नहीं रह गया है।

इसके साथ ही साथ काले काँच वाले वाहनों के खिलाफ भी यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के द्वारा अब तक किसी तरह की माकूल कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया गया है। जिला प्रशासन के ध्यानाकर्षण की जनापेक्षा की जा रही है।

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