जर्जर हो रहे बस स्टैण्ड के खाली पड़े कमरे!

 

 

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डेढ़ दशकों से नहीं हुआ अस्सी फीसदी कमरों का उपयोग

(लिमटी खरे)

सिवनी (साई)। शहर के सरकारी बस स्टैण्ड का शायद ही किसी जिलाधिकारी या जन प्रतिनिधि के द्वारा बारीकी से अवलोकन किया गया हो। सरकारी बस स्टैण्ड में अनेक कमरे तो ऐसे हैं जिन कमरों का उपयोग डेढ़ दशकों में शायद ही कभी हुआ हो। इन कमरों की उपयोगिता पर भी प्रश्न चिन्ह ही लग रहे हैं।

ज्ञातव्य है कि जब मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अस्तित्व में था उस समय सरकारी बस स्टैण्ड पूरी तरह आबाद रहा करता था। इस बस स्टैण्ड के भूतल में सिवनी डिपो का कार्यालय लगा करता था। इसके पश्चिमी हिस्से में डिपो की कर्मशाला, भण्डार गृह, पेट्रोल पंप आदि हुआ करता था। कर्मशाला और डिपो के बीच एक बड़ा सा द्वार हुआ करता था।

सुश्री विमला वर्मा की दूरदर्शी सोच के चलते ही सिवनी में मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम का संभागीय कार्यालय भी अस्तित्व में आया। इसके पूर्व सिवनी डिपो का अधीक्षण संभागीय प्रबंधक (डीव्हीएम) जबलपुर के द्वारा किया जाता था। सिवनी में संभागीय कार्यालय के अस्तित्व में आने के उपरांत डिपो कार्यालय के प्रथम तल पर संभागीय कार्यालय का संचालन किया जाता रहा।

इक्कीसवीं शताब्दी के आगाज के साथ ही जब मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बंद करने की घोषणा की गयी उसके बाद सिवनी में डिपो कार्यालय और संभागीय प्रबंधक कार्यालय पूरी तरह वीरान हो गये। इसके बाद इन कार्यालयों के कमरों का उपयोग शनैः शनैः बंद ही कर दिया गया।

बस स्टैण्ड परिसर में डिपो कार्यालय और संभागीय प्रबंधक कार्यालय के कमरों का उपयोग सालों से न किये जाने से ये अब जर्जर हालत को प्राप्त होते जा रहे हैं। इन कमरों का उपयोग किसी अन्य सरकारी कार्यालय (जो वर्तमान में किराये के भवन में संचालित हो रहे हैं) को लगाया जा सकता है।

जानकारों का कहना है कि लगभग डेढ़ दशकों से इन कमरों का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है यह शोध का ही विषय है। इसके अलावा बस स्टैण्ड में अति प्राचीन प्याऊ जो विवेकानंद पुस्तक भण्डार के बाजू में हुआ करती थी वह भी दो दशकों से अधिक समय से गायब ही है।

जानकार बताते हैं कि बस स्टैण्ड के भवन के अंदर एक कैंटीन का संचालन भी दो तीन दशकों तक किया जाता रहा है। सिवनी शहर में एकमात्र यही जगह हुआ करती थी जहाँ चौबीसों घण्टे चाय एवं खाने की सामग्री लोगों को मिल जाया करती थी। राज्य परिवहन के बंद होने के कुछ साल पहले इस कैंटीन को भी बंद करवा दिया गया था। अब रात के समय सिवनी से होकर गुजरने वाले यात्रियों को चाय – पान के लिये भी तरसना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि बस स्टैण्ड परिसर के अंदर जितने भी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों (जिनके पास वैध अनुज्ञा है) का संचालन किया जा रहा है उन्हें इन रिक्त कमरों में स्थान दिया जाकर बस स्टैण्ड के वर्तमान परिसर का रकबा बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही अवैध रूप से संचालित होने वाली यात्री बस को अगर बस स्टैण्ड में प्रवेश करने से रोक दिया जाये तो बस स्टैण्ड में वाहनों की रेलम पेल कम की जा सकती है।

(क्रमशः जारी)

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