रेन्डम निरीक्षण में हो सकती है स्थिति स्पष्ट

 

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(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। खेती किसानी करने वाले खाद के लिये यहाँ वहाँ भटक रहे हैं और ब्रहस्पतिवार को भी प्रशासन की ओर से यह बात सार्वजनिक नहीं करायी गयी कि जिले के किन – किन गोदामों में खाद का कितना स्टाक है! किस सोसायटी से कितनी खाद बांटी जा चुकी है! कितने किसानों को खाद मिल चुकी है!

उल्लेखनीय होगा कि प्रदेश में खाद के संकट को देखते हुए किसानों के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री कमल नाथ के द्वारा केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा कर प्रदेश के किसानों को खाद उपलब्ध कराने की कवायद की गयी थी। इस संबंध में लगभग रोज ही इस तरह की विज्ञप्तियां राज्य स्तर पर जारी भी हो रही हैं जिसमें खाद की उपलब्धता के बारे में बताया जा रहा है।

विडम्बना ही कही जायेगी कि सिवनी में न तो किसान कल्याण विभाग को इतनी फुर्सत है और न ही जिला विपणन अधिकारी के पास ही इतना समय है कि वे जिले के गोदामों में उपलब्ध खाद के स्टॉक को सार्वजनिक कर किसानों तक इस संदेश को भिजवायें कि किस गोदाम या किस सोसायटी में कितनी खाद उपलब्ध है।

इस तरह की परिस्थितियों में किसानों को व्यापारियों के पास से महंगी दरों पर खाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि व्यापारियों के द्वारा खाद के साथ कीटनाशक और अन्य सामग्री भी जबरन ही थमायी जा रही है। अगर किसानों ओर से व्यापारियों के द्वारा थमाये जाने वाले कीटनाशक आदि को लेने से मना किया जाता है तो व्यापारियों के द्वारा किसानों को खाद देने से मना कर दिया जा रहा है।

किसान कल्याण विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पिछले साल अगस्त माह में किसान कल्याण अधिकारी के द्वारा जिले के खाद व्यापारियों को नोटिस जारी कर यह जानकारी माँगी गयी थी कि व्यापारियों के द्वारा किस कंपनी की कितनी खाद किन किसानों को प्रदाय की गयी।

सूत्रों ने कहा कि इस तरह की जानकारी लेने के पीछे यही उद्देश्य था कि किसान कल्याण विभाग के आला अधिकारियों के संज्ञान में यह बात लायी गयी थी कि रेक प्वाईंट से जिलों के हिस्से में से काफी मात्रा में खाद को विपणन अधिकारी कार्यालय के द्वारा व्यापारियों को बेच दिया जा रहा था। इस मामले में क्या कार्यवाही हुई इस बारे में अभी तक कोई जानकारी किसी को भी नहीं मिल पायी है।

सूत्रों ने कहा कि अपेक्षाकृत सक्रिय और तेज तर्रार जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह को चाहिये कि वे किसी अधिकारी को इसके लिये पाबंद कर दें कि वह अधिकारी सहकारी समितियों, विपणन संघ के गोदामों आदि की रेण्डमली जाँच कर वहाँ संधारित पंजियों को देखकर खाद की उपलब्धता और वितरण की जमीनी स्थिति का आंकलन कर जिला प्रशासन को आवगत कराये।

सूत्रों ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन को चाहिये कि खाद व्यापारियों के द्वारा खाद कंपनियों से कितनी मात्रा में कितनी खाद ली और उसके एवज में कितनी राशि चुकायी गयी! इससे इस बात का पता भी चल सकेगा कि खाद व्यापारियों को नामी गिरामी कंपनियों की बेहतर खाद के अलावा घटिया खाद को भी टेग किया गया है।

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