डाक मतपत्र बन सकते हैं परिणाम में विलंब का कारण!

 

पाँच क्यूआर कोड वाले ईटीपीबी के कारण इनकी गिनती में लगेगा समय

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। ईटीपीबी (इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट) के कारण मतगणना के बाद परिणाम विलंब से आने की उम्मीद है। इसके अलावा पोस्टल बैलेट की गिनती में भी विलंब लग सकता है। मतगणना आरंभ होने के बाद निश्चित समय में अगर इन मतों की गिनती नहीं हो पायी तो आखिरी के दौ राउण्ड की गिनती को रोका जाकर पहले इनकी गिनती की जायेगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ईटीपीबी की गिनती के लिये निर्वाचन आयोग के द्वारा एक्सपर्टस की सेवाएं ली जा रही हैं। मतगणना के दौरान मतों की गिनती पूरी हो इसके लिये आयोग ने प्रावधान किया है कि पहले डाक मतपत्रों की गिनती शुरूआती समय में आधे घण्टे से की जायेगी।

बताया जाता है कि अगर पोस्टल बैलेट और ईटीपीबी की गिनती आधे घण्टे में पूरी नहीं हो पायी तो ईवीएम से की जा रही गिनती में आखिरी के दो राउण्डों को रोककर पहले कर्मचारियों के मतों की गिनती पूरी की जायेगी जिसके बाद अंत के दो राउण्ड की गिनती की जायेगी।

बताया जाता है कि चुनावी कार्य में लगे सरकारी कर्मचारियों के द्वारा डाले गये पोस्टल बैलेट दो लिफाफों में आयेंगे। इसमें हस्ताक्षर आदि का मिलान किया जायेगा। इस बार सरकारी कर्मचारियों ने भी मतदान में उत्साह दिखाया है, जिसके चलते मतगणना में पोस्टल बैलेट और ईटीबीपी की गिनती में समय लग सकता है।

एक सर्विस वोट में पाँच क्यूआर कोड : पहली बार इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट (ईटीपीबी) के उपयोग से इस बार विधान सभा चुनाव की मतगणना के समय पर असर पड़ेगा। एक सर्विस वोट के ईटीपीबी में पाँच क्यूआर कोड हैं, जिन्हें स्केन करके खोलना होगा। एक वोट एक ही बार स्केन करने का अवसर रहेगा। इस पूरी प्रोसेस में कम से कम तीन से चार मिनिट का समय लगेगा। इसके साथ ही डाक मतपत्रों में भी दो लिफाफे आये हैं जिनमें हस्ताक्षर आदि के मिलान में वक्त लग सकता है।

लग सकता है ज्यादा वक्त : यह व्यवस्था चूंकि पहली बार ही की गयी है इसलिये इस व्यवस्था को समझने और करने में मतगणना में लगे कर्मचारियों को समय लग सकता है। इसके लिये सभी जगह आईटी एक्सपर्ट और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हालात देखकर कोई भी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि 11 दिसंबर को मतगणना में आधिकारिक तौर पर परिणाम कितने बजे तक घोषित हो पायेंगे।

क्या है ईटीपीबी : प्राप्त जानकारी के अनुसार सर्विस वोटर वो वोटर हैं जो भारत की विभिन्न सेनाओं सहित सुरक्षा एजेंसी सहित अन्य एजेंसियों में अपने जिले – प्रदेश से बाहर सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें मतदान में शामिल कराने के लिये ऑनलाइन इनके विभागों के रिकॉर्ड शाखाओं को वोट के लिये लिंक भेज दिये जाते हैं।

बताया जाता है कि अभी तक मेन्युअली पोस्टल बैलेट की तरह वोट भेजे जाते थे और साधारण तरीके से ही आते थे। इस बार ऑनलाइन लिंक के जरिये पोस्टल बैलेट भेजा गया और उनका वोट लौटकर वहाँ से मेन्युअली ही आयेगा। आने वाले लिफाफे में पाँच क्यूआर कोड होंगे।

पाँच क्यूआर कोड, मतपत्र होगा स्केन : सर्विस वोटर का जो लिफाफा आयेगा उसमें सबसे ऊपर वाले लिफाफे में एक क्यूआर कोड होगा, जिसे स्केन किया जायेगा। घोषणा पत्र भी लिफाफे में होगा, जिसमें एक क्यूआर कोड होगा। इसके बाद अंदर घोषणा पत्र होगा, जिसमें दो क्यूआर कोड होंगे, इन दोनों को स्केन किया जायेगा। सर्विस वोटर का मतपत्र भी स्केन किया जायेगा तब फाईनल प्रोसेस आगे बढ़ेगी। क्यूआर कोड को एक ही बार स्केन करने का नियम है, दो बार कर दिया तो वोट निरस्त हो सकता है।

कहाँ कितने वोट : जिले के बरघाट विधान सभा में 1684 मत, सिवनी में 3423 मत, केवलारी में 1610 और लखनादौन में 1512 डाक मतपत्र जारी किये गये हैं। जिले में 8229 डाक मतपत्र जारी किये गये हैं। सर्विस वोटर की मद में जिले में कुल 718 सर्विस वोटर हैं जिसमें से 363 सिवनी में, लखनादौन में 90, केवलारी में 142 और बरघाट में 150 सर्विस वोटर्स हैं।

इसके अलावा ईडीएस मतों की बात करें तो इनकी कुल संख्या 1849 है जिसमें से बरघाट में 268, सिवनी में 285, केवलारी में 625 और लखनादौन में 671 ईडीएस मत हैं।

दो मिनिट एक ईटीपीबी में लगेगा : सर्विस वोटरों के इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड वोट को गणना में शामिल करने में पाँच क्यूआर कोड को स्केन करना है। मतपत्र को अलग से स्केन किया जायेगा। इसमें कम से कम दो से तीन मिनिट लगेंगे। अलग से एआरओ और कर्मचारी बैठाये जा रहे हैं। इसके लिये तकनीकि विशेषज्ञ (आईटी एक्सपर्ट) लगाये गये हैं। मतगणना एक बार आरंभ होने के बाद जब तक पूरी न हो इसे रोका नहीं जा सकता है। इस लिहाज से सर्विस वोट में ज्यादा समय लगने की उम्मीद है।

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