अब काँग्रेसी नेताओं पर निर्भर है जिले का विकास!

 

 

जिले के काँग्रेसी नेताओं पर टिकी हैं जिले के निवासियों की नजरें

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। काँग्रेस की कमल नाथ के नेत्तृत्व वाली सरकार में भले ही सिवनी जिले को सीधे – सीधे प्रतिनिधित्व नहीं मिला हो पर महाकौशल अंचल जिस तरह ताकतवर होकर उभरा है उससे सिवनी के विकास की संभावनाएं बढ़ती दिख रही हैं। डी.पी. मिश्रा के बाद कमल नाथ महाकौशल अंचल के क्षत्रप हैं जो मुख्यमंत्री बने हैं।

महाकौशल में छिंदवाड़ा से मुख्यमंत्री कमल नाथ, नरसिंहपुर से विधान सभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति, बालाघाट से हिना कांवरे विधान सभा उपाध्यक्ष, जबलपुर से लखन घनघोरिया और तरूण भनोट, मण्डला से टूटकर अलग जिला बने डिंडोरी से ओंकार सिंह मरकाम एवं बालाघाट से निर्दलीय जीते प्रदीप जैसवाल प्रदेश में मंत्री बनाये गये हैं। इस लिहाज से सिवनी के आसपास के लगभग सारे जिले सियासी तौर पर समृद्ध हो चुके हैं।

सिवनी जिले से योगेंद्र सिंह दूसरी बार लखनादौन से जीते हैं तो बरघाट से अर्जुन सिंह काकोड़िया पहली बार ही विधायक बने हैं। चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमल नाथ ने केवलारी की जनता से यह बात भी कही थी कि अगर वे रजनीश सिंह को विजयी बनाते हैं तो रजनीश सिंह का मंत्री बनना तय है। सारे प्रयासों के बाद भी रजनीश हरवंश सिंह केवलारी से दूसरी बार विजय पताका नहीं फहरा सके।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि पिछली सदी के अंतिम दशक तक सिवनी में एक दो नहीं वरन तीन – तीन मंत्री हुआ करते थे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के आने के बाद डॉ.ढाल सिंह बिसेन ही आखिरी मंत्री थे। उनके बाद सिवनी को प्रदेश में प्रतिनिधित्व मिलना मानो बंद ही हो गया।

अब प्रदेश में काँग्रेस की सरकार काबिज हुई है। महाकौशल क्षेत्र से मुख्यमंत्री कमल नाथ हैं। कमल नाथ के समर्थक भी भारी तादाद में सिवनी में मौजूद हैं। इसके अलावा सिवनी के काँग्रेस के नेताओं के संबंध प्रदेश सरकार के मंत्रियों से भी बहुत ही मधुर हैं।

इस लिहाज से लोगों की उम्मीदें अब काँग्रेस के नेताओं पर जाकर टिक गयी हैं। काँग्रेस के जिला स्तर के नेताओं के द्वारा अगर सिवनी के विकास की योजनाएं बनवाकर उन्हें प्रदेश शासन से समयसीमा में अमली जामा पहनाया जाता है तो जिले में काँग्रेस अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने में सफल हो सकती है।

यहाँ उल्लेखनीय होगा कि सिवनी जिले में विकास की जो भी इबारत लिखी गयी है वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश में सालों तक मंत्री रहीं सुश्री विमला वर्मा के कार्यकाल की उपलब्धि मानी जा सकती है। सुश्री विमला वर्मा के सक्रिय राजनीति से किनारा करते ही सिवनी के हिस्से में जो कुछ भी आया है वह प्रदेश या केंद्र की योजना के तहत मिला है इसमें किसी नेता को इसका श्रेय देना बेमानी ही होगा।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *