पॉलीथिन पर नहीं है पालिका का बस

 

 

सरेआम बिक रही अमानक पॉलीथिन, कचरे के लगे हैं ढेर

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। प्रदेश में निजाम अवश्य बदल गये हों पर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अभी भी पहले की तरह ही दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जिले भर में विशेषकर जिला मुख्यालय में अमानक पॉलीथिन में सामग्रियां बिक रही हैं, पर भाजपा शासित नगर पालिका परिषद को इसकी परवाह नजर नहीं आ रही है।

शहर भर में निर्धारित से कम माईक्रोन की पॉलीथिन का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के द्वारा कुछ माह पूर्व शनिवार (जिस दिन शहर का बाजार बंद रहता है) को पॉलीथिन की जाँच की गयी और कई किलो पॉलीथिन जप्ति की कार्यवाही को अंजाम दिया गया था।

शहर में ऐसा कोई कोना शायद ही छूटा हो जहाँ पॉलीथिन के अवशेष हवा में उड़ते न दिखें। शहर भर में पॉलीथिन की पन्नियां या तो नालियों को चोक करती नजर आती हैं या फिर छोटे – बड़े पेड़ पौधों में फंसकर हवा में लहराती दिखती हैं। कुछ स्थानों पर तो लोग इनसे इस कदर आजिज आ चुके दिखते हैं कि उनके द्वारा इनका ढेर बनाकर इन्हें आग के हवाले कर दिया जाता है।

सब्जी की दुकान हो या किराना की दुकान, हर स्थान पर निर्धारित से कम माईक्रोन वाली पॉलीथिन में सामग्री देने का क्रम बदस्तूर जारी है। लगभग दो साल पहले आम आदमी पार्टी की नेता कोमल जैसवाल के द्वारा सिवनी को पॉलीथिन मुक्त कराने के लिये एक अभियान भी छेड़ा गया था, किन्तु भाजपा शासित पालिका परिषद के कथित असहयोग के चलते उनका यह अभियान भी एक पखवाड़े में ही धराशायी हो गया था।

शहर में सुबह सवेरे जब सड़कों की सफाई की जाती है तब नगर पालिका के सफाई कर्मियों के द्वारा भारी तादाद में पॉलीथिन को एकत्र कर उसके ढेर लगाये जाते हैं। सबसे ज्यादा पॉलीथिन बुधवारी, शुक्रवारी स्थित बाजार, बस स्टैण्ड, बारापत्थर एवं उन स्थानों पर निकलती है जहाँ व्यवसायिक प्रतिष्ठान हैं।

लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद पता नहीं किस दीगर गैर जरूरी काम में उलझी है कि उसे पर्यावरण की सबसे बड़ी दुश्मन मानी जाने वाली पॉलीथिन पर अंकुश लगाने की फुर्सत नहीं मिल पा रही है। पालिका के पास पर्याप्त अमला होने के बाद भी इस दिशा में किसी तरह की प्रतिबंधात्मक कार्यवाही नहीं होने से व्यवसायियों के हौसले बुलंदी पर हैं।

लोगों ने बताया कि पूर्व में जब प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के द्वारा अमानक पॉलीथिन के खिलाफ कार्यवाही की गयी थी उसके बाद लगभग एक पखवाड़े तक शहर की दुकानों से अमानक पॉलीथिन गायब हो गयी थी। व्यापारियों को जैसे ही यह आभास हुआ कि नगर पालिका और प्रदूषण मण्डल अब कार्यवाही नहीं करेंगे, वैसे ही अमानक पॉलीथिन का उपयोग धड़ल्ले से आरंभ हो गया।

शहर में जब भी अपेक्षाकृत तेज हवा चलती है तब पॉलीथिन हवा में उड़ती दिख जाती है। शहर की नालियों की अगर करीने से सफाई करवा दी जाये तो इन नालियों में टनों से अमानक पॉलीथिन के अवशेष मिल जायेंगे। खाली प्लाट, मैदानों में पेड़ों पर भी पॉलीथिन हवा में उड़ती दिखती हैं जो इस बात की चुगली करती है कि नगर पालिका को अमानक पॉलीथिन के मामले में ज्यादा लेना – देना नहीं रह गया है।

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