अगली सरकार पर निर्भर है मेडिकल कॉलेज!

 

0 मेडिकल कॉलेज बनाम चुनावी हथकण्डा . . . 02

विधान सभा में जरूरी है कैबिनेट के प्रस्ताव पर मुहर लगना!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। चुनाव से महज तीन माह पहले ही प्रदेश की शिवराज सरकार के द्वारा मंत्री मण्डल की बैठक (कैबिनेट) में सिवनी के लिये मेडिकल कॉलेज की सौगात भले ही दे दी हो पर वास्तविक धरातल पर इसका बनना बहुत ही कठिन प्रतीत हो रहा है। लोग इसे चुनावी हथकण्डा ही मानकर चल रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि चुनाव तक विधान सभा का सत्र संभव नहीं दिख रहा है जिसके चलते कैबिनेट में पारित प्रस्ताव का महत्व बहुत ज्यादा नहीं होगा। यह इसलिये क्योंकि कैबिनेट के द्वारा पारित प्रस्ताव को संबंधित विभाग के मंत्री के द्वारा विधान सभा में रखा जाकर इसे पारित करवाया जाता है।

जानकारों की मानें तो विधान सभा में प्रस्ताव के पारित होने के बाद इसके लिये सांकेतिक बजट आवंटन किया जाकर इसे नान प्लान से प्लान मद में लाया जाता है। जानकारों ने बताया कि इसके उपरांत यह प्रस्ताव राज्य सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के द्वारा तैयार कराया जाकर इसे केंद्र सरकार को भेजा जायेगा।

इधर, राज्य सचिवालय वल्लभ भवन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अमूमन इस तरह के मामलों में सफलता तब हासिल होती है जब कोई सांसद या विधायक इस तरह के मामले में पूरी तरह पीछे लगकर फाईल को हर कदम पर पुश करते हुए फॉलोअप लेते रहे।

उक्त संबंध में सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से ग्रीन सिग्नल मिलने से पहले एमसीआई का एक दल मौका मुआयना करने, मेडिकल कॉलेज से संलग्न या संबद्ध अस्पताल का निरीक्षण करने जाता है। एमसीआई का दल अगर संतुष्ट होता है तब उसकी अनुशंसा पर केंद्र सरकार के द्वारा मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिये अनुमति प्रदाय की जाती है।

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में दिसंबर में संभावित विधान सभा चुनावों के पहले विधान सभा का सत्र आहूत न होने की स्थिति में सब कुछ अगली सरकार किसकी बनती है! उस सरकार की प्राथमिकता पर सिवनी का मेडिकल कॉलेज रहता है अथवा नहीं! इस बात पर ही निर्भर करता है।

इसके साथ ही सूत्रों ने कहा कि अगर सिवनी में मेडिकल कॉलेज को खोलने की मंशा वर्तमान सरकार की थी तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के द्वारा 05 मई को पॉलीटेक्निक मैदान में की गयी घोषणा के साथ ही जिले के सांसद और विधायकों को चाहिये था कि वे चिकित्सा शिक्षा विभाग पर दबाव बनाते हुए इस मामले को विधान सभा के वर्षाकालीन सत्र में रखवाकर इसे पारित करवाते।

सूत्रों ने कहा कि शिवराज सिंह सरकार की तीसरी पारी के अंतिम समय में अगर कैबिनेट ने इसे पास कर दिया है तो चुनावी हथकण्डा ही माना जायेगा। सूत्रों ने कहा कि सिवनी में मेडिकल कॉलेज खोले जाने को लेकर मार्च 2013 से लेकर कागजी कार्यवाही जारी थी, पर पाँच सालों में भी यह मामला वल्लभ भवन की सीढ़ियां नहीं उतर पाया!

(क्रमशः जारी)

 

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