डिब्बा बंद सामग्री खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान!

 

(वाणिज्य ब्यूरो)

सिवनी (साई)। त्यौहारी सीजन आते ही पैक्ड फूड की माँग में एकाएक वृद्धि देखी जाती है। आज की फास्ट लाईफ में ये घर-घर दस्तक दे चुका है। कहीं समय न मिलने की मजबूरी तो कहीं इसके बेहतरीन स्वाद ने लोगों को इसका दीवाना बना दिया है। पैक्ड फूड में खाने – पीने की चीजों की लंबी सूची है।

इसे बनाने के लिये न तो घण्टों किचन में खड़े होने की जरूरत है और न ही पसीना बहाने की। बस पैकेट या ढक्कन खोलो और खा या पी लो। पर क्या ये खाद्य पदार्थ हमारे स्वास्थ्य के लिहाज से भी उतने ही सुरक्षित हैं जितने कि बनाने की सहूलियत के मामले में?

पैक्ड फूड आकर्षक बनाने के लिये इसमें मिलाये गये आर्टिफीशियल कलर और प्रिजर्वेटिव के कारण कई बीमारियां होने की संभावना रहती है.. जैसे, पेट में गैस बनने की समस्या, पाचनतंत्र से जुड़ी समस्या आदि। अतः जब कभी रेडी टू ईट फूड लेना पड़े तो सबसे पहले फूड लेवल में लिखित खास बातों को ध्यान से पढ़ना न भूलें।

खाने-पीने का आईटम खरीदते समय सबसे पहले डिब्बे या पैकेट पर छपी सूचना को आवश्यक रूप से सबसे पहले पढ़ना चाहिये। उसी खाद्य पदार्थ को तरजीह दें, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी हो। इस जानकारी के तहत प्रोडॅक्ट के उत्पादन व एक्सपायरी डेट के अलावा प्रोडॅक्ट में प्रयुक्त किये जाने वाली सामग्री, उस में मौजूद न्यूट्रिशनल वेल्यू व प्रयोग करने के संबंध में लिखा होता है।

बिना लेवल का कोई भी खाद्य पदार्थ न खरीदें। ऐसा फूड आप के स्वास्थ्य के लिये खतरनाक हो सकता है। जब भी खाने – पीने की डिब्बाबंद सामग्री खरीदें तो हमेशा नामी ब्रैंड को ही तरजीह दें। नूडल्स, बिस्कुट, रस, ब्रेड जैसे आईटम्स मैदे से बनी होने की बजाय आटे से बनी चीजों को प्राथमिकता दें।

पेय पदार्थ चाहे जूस हो अथवा कोल्ड ड्रिंक एक बार कैप खोलने के बाद ज्यादा दिन तक फ्रिज में स्टोर न करें। तत्वों की सूची में पहले स्थान पर मौजूद तत्व अनुपात में सब से ज्यादा होता है। फैट, कोलेस्ट्रॉल, सोडियम या साल्ट को सीमित मात्रा में ही लें।

यह भी जानना जरुरी : 100 ग्राम फूड आईटम में फैट की मात्रा 10 ग्राम से कम होनी चाहिये। 03 ग्राम फैट या उस से कम हो तो उसे लो फैट माना जाता है। प्रत्येक सर्विंग में 140 एमजी से कम नमक होना चाहिये। प्रति 100 ग्राम में 03 ग्राम से ज्यादा फाईबर होना चाहिये। कई फूड आईटम्स में लो कोलेस्ट्रॉल या कोलेस्ट्रॉल फ्री लिखा होता है, लेकिन इसकी जगह सेचुरेटेड फैट ज्यादा हो सकता है।

इसी तरह से लो शुगर या नो शुगर की जगह फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज जैसे दूसरे तत्त्व हो सकते हैं। कम फैट के चक्कर में न पड़ें, क्योंकि वास्तविकता और दावों में फर्क हो सकता है। शुगर की मात्रा पर नजर रखें। शुगर और स्टार्च के रूप में कार्बाेहाईड्रेट्स की कुल मात्रा देखें। जिस खाद्य पदार्थ में फाईबर की मात्रा ज्यादा हो उसी को वरीयता दें।

 

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