वाकई निष्पक्ष चुनावों की उम्मीदें बढ़ीं

 

काँग्रेस बचती रही शिकायत से, स्वसंज्ञान से की एसडीओ ने शिकायत

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। अगले महीने की 28 तारीख को होने वाले विधान सभा चुनावों में जिले में प्रशासनिक अमला निष्पक्ष चुनाव करवा सकता है। इसकी एक बानगी हाल ही में केवलारी में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा स्वसंज्ञान से दर्ज करवायी गयी शिकायत से देखने को मिली।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व सांसद और सिवनी की पूर्व विधायक श्रीमति नीता पटेरिया एवं भाजपा के केवलारी मण्डल अध्यक्ष सचिन अवधिया के द्वारा गत दिवस केवलारी में स्थान – स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के पोस्टर्स और स्टीकर्स चिपकाये जा रहे थे। इसी दौरान उनके द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में भी स्टीकर चिपका दिये गये।

उनके द्वारा जैसे ही यह किया गया वैसे ही क्षेत्र में यह खबर जंगल में आग की तरह फेल गयी। इसके बाद लोगों को इंतजार क्षेत्रीय विधायक रजनीश हरवंश सिंह या ब्लॉक अथवा जिला काँग्रेस की शिकायत का था, कि काँग्रेस के द्वारा विपक्ष की भूमिका अदा करते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की जायेगी।

बताया जाता है कि न तो क्षेत्रीय विधायक रजनीश हरवंश सिंह न ही ब्लॉक या जिला काँग्रेस के द्वारा इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की न ही इस मामले में एक भी विज्ञप्ति जारी करने की जहमत उठायी गयी। वहीं, दूसरी ओर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा खुद ही स्व संज्ञान से इसकी शिकायत केवलारी थाने में दर्ज करवायी गयी है।

लोगों का कहना है कि केवलारी क्षेत्र में अब तक भाजपा की पराजय का कारण कुछ कुछ स्पष्ट होता दिख रहा है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि काँग्रेस के नेताओं के द्वारा भाजपा के स्थानीय नेताओं को पूरी तरह साध कर रखा जाता था, और उन्हीं के बल पर चुनावी वैतरणी पार की जाती रही है।

क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार इतने बड़े मुद्दे पर भी क्षेत्रीय विधायक रजनीश हरवंश सिंह की चुप्पी को आखिर क्या समझा जाये! आखिर क्या कारण है कि विधायक रजनीश हरवंश सिंह के द्वारा भाजपा के केवलारी या जिला स्तर के नेताओं के खिलाफ अब तक कुछ नहीं कहा गया है!

वहीं, केवलारी के रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा स्व संज्ञान से दर्ज करवायी गयी शिकायत के बाद अब जिले में चर्चा चल पड़ी है कि इस बार के चुनाव बिना किसी के दबाव में पूरी तरह निष्पक्ष ही होंगे।

इधर, प्रशासनिक गलियारों में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार वर्तमान हालात ठीक उसी तरह के दिखायी दे रहे हैं जो वर्ष 2003 में दिखायी दे रहे थे। उस समय मुख्यमंत्री राजा दिग्विजय सिंह से नाराज चल रहे लोगों ने काँग्रेस को सत्ता के गलियारे से बाहर करते हुए भाजपा को सर आँखों पर बैठाया था।

 

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