क्रॅशर्स से उड़ती धूल कर रही बीमार!

 

मनमानी ब्लास्टिंग से हो रही ग्रामीणों को परेशानी

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। बण्डोल क्षेत्र में लगे क्रॅशर से उड़ रही धूल यहाँ के निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती नजर आ रही है। वहीं, क्रॅशर संचालकों के द्वारा पत्थर निकालने के लिये किये जा रहे धमाकों से क्षेत्र के लोग दहल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके द्वारा शिकायत किये जाने के बाद भी अब तक कोई हल नहीं निकल सका है।

बण्डोल क्षेत्र में अनगिनत क्रॅशर संचालित हो रहे हैं। तत्कालीन जिला कलेक्टर धनराजू एस. के द्वारा वर्ष 2016 के फरवरी माह में खनिज विभाग को निर्देश देते हुए जिले के 155 क्रॅशर्स का भौतिक सत्यापन कर दो माह में फोटो युक्त प्रतिवेदन दिये जाने की बात को भी खनिज विभाग के द्वारा हवा में ही उड़ा दिया गया है। विडम्बना ही कही जायेगी कि जिले के क्रशर्स का भौतिक सत्यापन आज तक पूरा नहीं किया जा सका है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब भी उनके द्वारा शिकायत की जाती है तो खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा मामले की जाँच का आश्वासन तो दे दिया जाता है किन्तु रसूखदारों के आगे, जाँच के आश्वासन महज आश्वासन में ही तब्दील हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी सुरक्षा इंताजामात के क्रॅशर्स के संचालकों के द्वारा यहाँ नियम कायदों को सरे आम धता बतायी जा रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्रॅशर्स के संचालकों के द्वारा पत्थर की खुदी खदानों को तारों से कव्हर्ड न किये जाने से बारिश के बाद इसमें भरे पानी में जब तब दुर्घटनाएं होती रहती हैं। नियमानुसार पत्थर की खुदी खदान को चारों ओर से कटीले तारों से घेरा जाना चाहिये।

ग्रामीणों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि यहाँ हो रही ब्लास्टिंग में भी सुरक्षा मानकों को ध्यान में नहीं रखा जा रहा है। ग्रामीणों की मानें तो देर रात होने वाली ब्लास्टिंग की आवाज से लोगों के मन में दहशत भर गयी है। बताया जाता है कि क्रॅशर्स वाले क्षेत्रों में नियमित पानी की सिंचाई भी नहीं की जाती, ताकि धूल के गुबार उठने से बचाये जा सकें।

ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया है कि रसूखदार क्रॅशर संचालकों के आगे नतमस्तक खनिज विभाग के द्वारा भी क्रॅशर्स का निरीक्षण नहीं किया जाता है। यहाँ उड़ने वाली धूल से न केवल दृश्यता कम होती है वरन यहाँ पेयजल के स्त्रोत भी प्रदूषित हुए बिना नहीं हैं।

उधर, खनिज विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सियासी नेताओं की सरपरस्ती में चलने वाले क्रॅशर के संचालकों के द्वारा नियम कायदों को इसलिये धता बतायी जाती है क्योंकि उन्हें किसी तरह की कार्यवाही का भय नहीं रह गया है।

सूत्रों ने कहा कि क्रॅशर्स के संचालकों को नियम कायदों के अनुसार अपने – अपने क्रॅशर के पास हरित क्षेत्र विकसित करना चाहिये जिसमें पेड़ लगाये जायें। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में शायद ही कोई क्रॅशर हो जहाँ ग्रीन बेल्ट की स्थापना की गयी हो। इसके अलावा दो क्रॅशर्स के बीच निर्धारित दूरी के मापदण्ड का भी खुला उल्लंघन जारी है।

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