दो दिवसीय प्रवास पर आयेंगे गुप्ता

 

एकल अभियान को लेकर अग्रवाल धर्मशाला में देंगे मार्गदर्शन

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। संगठन प्रभारी एकल अभियान पूर्व अंर्तराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री एवं विश्व हिन्दु परिषद के प्रमुख श्याम गुप्ता का सिवनी आगमन 08 दिसंबर को होने जा रहा है।

दो दिवसीय सेमीनार अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित होगा। एकल अभियान के संयोजक डॉ.सुनील अग्रवाल ने बताया कि इस देश में भगवान की कृपा से पहली बार हिन्दू स्वाभिमान की सरकार बनी है और वह भी पूर्ण बहुमत के साथ बनी जिसका श्रेय श्याम गुप्ता जैसे तपस्वियों को जाता है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि यह सब किसी इंसान के कारण नहीं, बल्कि भगवान की कृपा से पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि एकल के पीछे भी भगवान की शक्ति है और यह काम जरूर पूरा होगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण को लेकर जब लाखों की संख्या में भक्त राम जन्म भूमि पहुँच गये तो मुझे इस शक्ति का अहसास हुआ और लगा कि यह उनकी ही शक्ति है कि लाखों लोगों का हुजूम राम की जन्म भूमि पहुँचा है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमसे हमारा सनातन धर्म छीन लिया। हमारी शिक्षा पद्धति बदल दी। अंग्रेजों के आने के पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। पूरा देश सनातन धर्म पर चल रहा था। गुरुकुल परम्परा थी। गुरुकुल में चरित्र का निर्माण होता था। शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी। न्याय भी निःशुल्क था। सनातन धर्म का प्रभाव था, लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद शिक्षा और न्याय महंगा हो गया। मैकाले ने कहा था कि जब तक इस देश की शिक्षा नीति को नहीं बदला जायेगा तब तक हम इस देश पर शासन नहीं कर पायेंगे। काफी संख्या में लोग शिक्षित हैं। वैदिक सनातन धर्म यहाँ की पहचान है।

उन्होंने कहा कि अपना केवल हमारा काम है, जिसे हमें करना है। कार्यकर्त्ताओं को अपना चरित्र ऐसा बनाना चाहिये, जो आपके काम की पहचान बन सके। निस्वार्थ भाव से काम करना है। भगवान के भरोसे रहना भी ठीक नहीं है, क्योंकि भगवान हमारे चाकर नहीं है। भगवान अपने भक्तों का ध्यान जरूर रखते है, इसलिये अगर भगवान की कृपा चाहिये तो अच्छा भक्त बनना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि अहंकार नहीं पालें, क्योंकि भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती है। कथनी और करनी एक होनी चाहिये। निरंतर चिंतन करना चाहिये। यह एक बार में नहीं होगा, प्रयास करना होगा। लक्ष्य तो चरित्र और व्यवहार में दिखना चाहिये। एकल का काम ठीक चलता है, तो उसकी एक प्रतिमा समाज में दिखायी देती है। यह प्रतिमा कार्यकर्त्ता बनाते हैं। कार्यकर्त्ता बनना है, तो एकल के मूल आधार को अपनाना होगा।

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