उड़ने लगे फोरलेन के धुर्रे!

 

मीनाक्षी पर मेहरबान दिख रहा एनएचएआई!

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के स्वामित्व वाले सिवनी जिले में सड़क के हिस्सों के निर्माण और संधारण में एनएचएआई को ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख रही है। छपारा से सिवनी के बीच के सड़क मार्ग में अनेक स्थानों पर धुर्रे पूरी तरह उड़ चुके हैं फिर भी एनएचएआई की कुंभकर्णीय निंद्रा अब तक नहीं टूट पायी है।

एनएचएआई के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एनएचएआई के एमपी टू पैकेज (जिले में नरसिंहपुर सीमा से सिवनी शहर तक) का निर्माण मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा कराया गया था। इसमें बंजारी घाट का विवादित हिस्सा शामिल नहीं था।

सूत्रों ने बताया कि सड़क के इस हिस्से को बनाकर मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा वर्ष 2009 में एनएचएआई को सौंप दिया गया था। इसके बाद एनएचएआई के द्वारा मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन को सड़क के इस हिस्से का संधारण तब तक करने के लिये कहा गया था जब तक हर छः माह में एनएचएआई के द्वारा मीनाक्षी कंपनी को निश्चित राशि (जो निर्माण में खर्च हुई थी का हिस्सा) दी जायेगी।

सूत्रों ने बताया कि निविदा एवं अनुबंध की शर्तों के अनुसार सड़क में होने वाली दुर्घटनाओं के लिये संधारण करने वाली कंपनी को एक एंबूलेंस, पेट्रोलिंग मोबाईल, क्रेन आदि को चौबीसों घण्टे मुस्तैद रखना होगा। एंबूलेंस को हर पचास किलोमीटर की दूरी पर तैयार रखा जायेगा।

सूत्रों ने कहा कि एनएचएआई के द्वारा इन सारी बातों का ज्यादा प्रचार – प्रसार नहीं कराये जाने से लोगोें को इसकी जानकारी नहीं है। सूत्रों ने कहा कि फोरलेन पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को वर्तमान में 108 एंबूलेंस से लाया ले जाया जा रहा है, जबकि यह काम 108 की बजाय इस सड़क का संधारण कर रही कंपनी के जिम्मे था। इससे सरकार को 108 एंबूलेंस के लिये प्रति किलोमीटर अतिरिक्त राशि व्यय करना पड़ रहा है।

सूत्रों ने बताया कि इसके अलावा सड़क के किसी भी हिस्से के खराब होने पर उसे तत्काल ही दुरूस्त कराने की जवाबदेही ठेकेदार कंपनी की है। इतना ही नहीं हर पाँच साल में ठेकेदार कंपनी को समूची सड़क पर निर्धारित मानक के हिसाब से डामरीकरण करना भी आवश्यक है।

(क्रमशः जारी)

 

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