मेडिकल कॉलेज को भूल गये माननीय!

 

 

चार माह बीते घोषणा को आज भी नहीं उतर पायी धरातल पर!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। केंद्र में जब काँग्रेस की मनमोहन सिंह के नेत्तृत्व वाली सरकार सत्तारूढ़ थी उस समय की योजना लगभग पाँच सालों बाद परवान चढ़ पायी जिसके चलते सिवनी में आर्युविज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) स्वीकृत हुआ था। इसकी घोषणा के चार माह बाद भी इस मामले में कार्यवाही सिफर ही है।

ज्ञातव्य है कि 05 सितंबर को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा सिवनी में मेडिकल कॉलेज के लिये भूमि पूजन किया गया था। इस कार्यक्रम से भाजपा के आला नेताओं के द्वारा कथित तौर पर दूरी बनाये रखी गयी थी। इसके तत्काल बाद ही चुनाव होने थे इसलिये लोग इसे चुनावी शिगूफा करने से भी नहीं चूक रहे थे।

चुनाव संपन्न होने के बाद प्रदेश में भले ही सरकार काँग्रेस की आ गयी हो पर पिछली सरकार के द्वारा अगर सिवनी में मेडिकल कॉलेज खोलने की स्वीकृति दी गयी है तो इसके लिये सिवनी के विधायकों के द्वारा अपने स्तर पर हर संभव कोशिश की जाना चाहिये। लोगों का कहना है कि इसके लिये विधायकों को दलगत भावना से ऊपर उठकर काम करने की महती जरूरत है।

प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी में मेडिकल कॉलेज खोले जाने के लिये निविदा प्रक्रिया अटकी हुई है। कण्डीपार में लगभग 36 एकड़ की भूमि में तीन सौ करोड़ की लागत से बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज के मामले में सिवनी के विधायकों के द्वारा अब तक मुख्यमंत्री से इस संबंध में न तो मुलाकात की गयी है और न ही चिकित्सा शिक्षा विभाग से ही किसी तरह की बातचीत की गयी है।

सूत्रों का कहना है कि चुनाव के पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा इस मेडिकल कॉलेज का काम युद्ध स्तर पर करवाने की गरज से सिवनी के मेडिकल कॉलेज के लिये अधिष्ठाता (डीन) की नियुक्ति भी करवा दी गयी थी। छिंदवाड़ा के मेडिकल कॉलेज के डीन को ही सिवनी का प्रभार भी दिया गया है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि भले ही प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के स्थान पर काँग्रेस की सरकार बन गयी हो पर विधायकों के विशेषाधिकार आज भी वैसे हैं जैसे कि पूर्व में हुआ करते थे। सिवनी में अगर मेडिकल कॉलेज बनता है तो इसका लाभ जिले के चारों विधान सभा के लोगों को मिल सकता है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा मरीजों का इलाज किया जायेगा।

विधान सभा चुनावों के उपरांत परिवर्तन की लहर जैसे ही बही उसके बाद से जिले के चारों विधायक मानो सुसुप्तावस्था में चले गये हैं। इन चारों में से बरघाट के काँग्रेस विधायक अर्जुन सिंह काकोड़िया एवं केवलारी के भाजपा विधायक राकेश पाल सिंह पहली बार विधायक बने हैं तो सिवनी के भाजपा विधायक दिनेश राय और लखनादौन के काँग्रेस के विधायक योगेंद्र सिंह दूसरी बार विधायक बने हैं।

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