शहर में मच सकती है पेयजल की किल्लत!

 

 

अभी से पेयजल की समस्या से निपटने बनानी होगी पालिका को कार्ययोजना

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। भीमगढ़ जलावर्धन योजना की पूरक जलावर्धन योजना (नवीन जलावर्धन योजना) का काम समय सीमा में पूरा नहीं हो पाया है। अभी आधे से अधिक काम बाकी है। इन परिस्थितियों में इस साल भी गर्मी के मौसम में शहर के नागरिकों को पेयजल की समस्या से दो-चार होना पड़ सकता है। अनेक मोहल्लों में कम दबाव से पानी प्रदाय होने की शिकायतें भी मिलने लगी हैं।

ज्ञातव्य है कि नब्बे के दशक के आरंभ तक सिवनी में पेयजल का प्रदाय बबरिया जलाशय से किया जाता था। इसी दौरान तत्कालीन त्रिविभागीय मंत्री ठाकुर हरवंश सिंह के द्वारा जिला मुख्यालय को पेयजल प्रदाय करने के लिये भीमगढ़ जलावर्धन योजना का आगाज किया गया था।

वर्ष 2024 की शहर की आबादी को ध्यान में रखते हुए दो वक्त पानी मिल पाये, इस लिहाज से इस योजना को तैयार करवाया गया था। विडंबना ही कही जायेगी कि भीमगढ़ जलावर्धन योजना में कभी भी नागरिकों को लगातार तीसों दिन साफ पानी नहीं मिल पाया। जब चाहे तब इस योजना के पाईप फूटते तो कभी मोटर ही जल जाया करती।

इस योजना की समयावधि के पूर्ण होने के दस साल पहले ही भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा केंद्रीय इमदाद से पूरक जलावर्धन योजना को तैयार करवाना आरंभ किया गया। इस दौरान नागरिकों के द्वारा उठायी गयीं आपत्तियों के बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा चुनी हुई पालिका परिषद के ऊपर एक समिति का गठन कर दिया गया, जिससे सुझाव माँगे गये और इन सुझावों पर अमल की बात कही गयी।

एक बार फिर भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा नागरिकों की बात को दरकिनार कर नागरिकों के लिये बनायी जा रही इस योजना में पूरी तरह मनमानी करना आरंभ कर दिया गया। इस योजना को पहले 48 करोड़ रूपये की लागत से तैयार करवाया गया था।

इसकी निविदा के दौरान पालिका की निविदा समिति के द्वारा यह आपत्ति लगाकर कि इस योजना में ठेकेदार के द्वारा दी गयीं दरें आसपास के जिलों से बहुत अधिक हैं, इसे निरस्त करने की सिफारिश की गयी थी। मजे की बात तो यह है कि 48 करोड़ रूपये की मूल निविदा को जब स्वीकृति हेतु भोपाल भेजा गया तो यह योजना 48 करोड़ रूपये की बजाय 62 करोड़ 55 लाख रूपये की स्वीकृत होकर आ गयी।

नगर पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस जलावार्धन योजना का कार्यादेश मार्च 2015 में जारी किया गया था। इस लिहाज से इसका काम मार्च 2016 में पूर्ण कर लिया जाना चाहिये था। विडंबना ही कही जायेगी कि ठेकेदार के काम करने की गति को देखकर लग रहा है कि इसका काम मार्च 2019 में भी शायद ही पूरा हो पाये।

सूत्रों ने कहा कि नवीन जलार्धन योजना के ठेकेदार को काम पूरा करने के लिये बार – बार समय बढ़ाये जाने के बाद भी विपक्ष में बैठी काँग्रेस के पार्षदों ने इस पर सवाल नहीं उठाये। बहरहाल, बार – बार समय बढ़ाने के बाद भी ठेकेदार के द्वारा अब तक काम पूरा नहीं किये जाने से इस साल गर्मी के मौसम में अगर नगर पालिका परिषद के द्वारा पूर्व से ही तैयारियां नहीं की गयीं तो पानी का संकट विकराल रूप भी धारण कर सकता है।

इसके साथ ही सूत्रों ने कहा कि नगर पालिका के पास खराब पड़े टैंकर्स को समय रहते ठीक करवाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही साथ जिला प्रशासन अगर पालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की संयुक्त बैठक आहूत कर शहर के बंद पड़े नलकूपों को पीएचई के माध्यम से चालू करवाने का प्रयास करे तो इस समस्या से काफी हद तक निजात पायी जा सकती है।

सूत्रों ने कहा कि अब तापामान में निरंतर बढ़ौत्तरी दर्ज की जा रही है। इसके बाद भी पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों को शहर में गर्मी के मौसम के जलसंकट को लेकर किसी भी तरह की हलचल दिखायी नहीं दे रही है।

तत्कालीन निर्दलीय विधायक रहे दिनेश राय के द्वारा पिछले साल फरवरी माह में जलावर्धन योजना को आरंभ करने की डेड लाईन तय किये जाने के लगभग साल भर बाद भी जलावर्धन योजना का काम पूरा नहीं हो पाया। अब वर्तमान जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा जलावर्धन योजना का काम पूरा करने के लिये 28 फरवरी की डेड लाईन तय की गयी है। इसके बाद भी आलम यह है कि अनेक मोहल्लों में आज भी जलावर्धन योजना की पाईप लाईन नहीं डाली गयी है।

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