20 हजार में कैमरा यूनिट लगाने तैयार है ठेकेदार!

 

0 किसने खरीदी 38 लाख की . . .04

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को दिये व्हाट्सएप्प पर कोटेशन!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। निजि तौर पर जो फर्म आधे से कम कीमत पर कैमरों का यूनिट लगाने को तैयार है उस फर्म से दोगनी से ज्यादा कीमत पर इस यूनिट को लगवाकर जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा शासन को लाखों रूपये का चूना लगाया गया है। इस मामले में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष में बैठी काँग्रेस का मौन आश्चर्य का विषय बना हुआ है।

उल्लेखनीय होगा कि जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रम छात्रावासों में चार कैमरों का एक पूरा सेट लगाने के लिये जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा 42 हजार 460 रूपये प्रति यूनिट के हिसाब से बालाघाट की प्रशांत इंटरप्राईजेस को भुगतान किया गया है। इस काम के लिये विभाग के द्वारा किस समाचार माध्यम के जरिये निविदा का प्रकाशन कराया गया, यह बात भी शायद ही कोई जानता हो।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा उसी विनिर्देश (स्पेसीफिकेशन) के यूनिट के लिये बालाघाट के प्रशांत इंटरप्राईजेस के कर्त्ताधर्त्ता के मोबाईल नंबर 90743 84012 पर फोन कर कोटेशन चाहे गये। इन कैमरा यूनिट्स को महाकौशल अंचल के विभिन्न जिलों में लगाये जाने की बात भी उक्त कर्त्ताधर्त्ता से की गयी।

उक्त मोबाईल नंबर से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को सोशल मीडिया व्हाट्सएप्प पर इन यूनिट्स की लागत के बारे में जो डिटेल दिये गये उसके अनुसार प्रशांत इंटरप्राईस के द्वारा दिये गये कोटेशन में सीपी प्लस कंपनी का 1.3 मेगा पिक्सल का डोम कैमरा 1179 रूपये के हिसाब से दो कैमरे 2358 रूपये, बुलट कैमरा 1297 रूपये के हिसाब से दो कैमरे 2594 रूपये, चार चैनल का डीवीआर 3150 रूपये, पॉवर सप्लाई 500 रूपये, वायर का एक बण्डल 1050 रूपये, दो टीबी की हार्ड डिस्क 5280 रूपये, इंस्टालेशन चार्ज 300 रूपये प्रति कैमरा के हिसाब से 1200 रूपये एवं कनेक्टर्स के लिये 500 रूपये, इस तरह कुल 16 हजार 632 रूपये में लगाने की बात कही गयी है।

इसी तरह सीपी प्लस कंपनी के 2.4 मेगा पिक्सल डोम कैमरे 1630 रूपये के हिसाब से दो कैमरे 3260 रूपये, बुलट कैमरे 1740 रूपये के हिसाब से दो कैमरे 3480 रूपये, चार चैनल का डीवीआर 3150 रूपये, पॉवर सप्लाई पाँच सौ रूपये, वायर का एक बण्डल 1050 रूपये, दो टीबी की हार्ड डिस्क 5280 रूपये, चार कैमरों का इंस्टालेशन 1200 रूपये और कनेक्टर्स 500 रूपये, इस तरह कुल 19470 रूपये में चार कैमरों की एक यूनिट का इंस्टालेशन करने की बात समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कही गयी है।

इस तरह यह स्पष्ट हो रहा है कि जो फर्म सरकारी स्तर पर सप्लाई किये जाने वाले कैमरा यूनिट्स को 42 हजार 460 रूपये में लगाकर भुगतान प्राप्त कर रही है वही फर्म निजि तौर पर उसी विनिर्देश के यूनिट्स को आधे से कम दर (महज 19 हजार 470 रूपये) में लगाने को तैयार है।

यहाँ मामला आईने की तरह साफ ही नजर आ रहा है कि या तो अधिकारियों के कहने पर बाजार दर से अधिक दर पर निविदा बुलायी गयी है या अधिकारियों के द्वारा बाजार दरों के मामले में दरयाफ्त किये बिना ही लाखों रूपये अधिक का भुगतान किया जाकर शासन को क्षति पहुँचाने की कवायद की गयी है।

कुछ लोगों का कहना है कि वे इस मामले को लोकायुक्त एवं राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्लू) को भेजकर इसकी जाँच की माँग करेंगे। जिला प्रशासन से जनापेक्षा है कि इस तरह के मामले की जाँच उच्च स्तर पर करवायी जाये ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके।

 

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