लोटा लेकर शौच के लिये बाहर जा रहे शहरवासी!

 

 

स्वच्छता की राह में लोटा बन रहा रोड़ा!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त का जिला मुख्यालय में ही पालन नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को खुले में शौच जाने से रोका जा रहा है लेकिन नगरीय क्षेत्र के लोग भी जागरुकता के अभाव में खुले में ही शौच जा रहे हैं।

सिवनी शहर में झुग्गी बस्ती वाले इलाकों में आज भी सुबह होते ही बड़ी तादाद में महिलाएं एवं पुरूष घरों से निकलकर खुले में शौच के लिये जाते हुए देखे जा सकते हैं। शहर में कटंगी नाका, बरघाट नाका, गंज, छिंदवाड़ा नाका, मरझोर, लूघरवाड़ा, डूण्डा सिवनी, बींझावाड़ा आदि स्थानों पर लोगों को खुले में शौच के लिये आते – जाते आसानी से देखा जा सकता है।

एक ओर तो स्वच्छ शहरों की फेहरिस्त में शामिल होने प्रदेश के अनेक जिले प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिवनी नगर पालिका प्रशासन के द्वारा इस तरह के प्रयास होते दिख ही नहीं रहे हैं ताकि सिवनी शहर को भी देश के स्वच्छ शहरों की सूची में शामिल कराया जा सके।

शहर के अनेक हिस्सों में पौ फटते ही लोगों को हाथ में लोटा, बाल्टी, प्लास्टिक की बोतलें लेकर दिशा मैदान जाते आसानी से देखा जा सकता है। देश के प्रधान मंत्री सफाई अभियान की लाख दुहाई दें किन्तु सिवनी शहर में आज भी अनेक परिवार खुले में शौच करने को मजबूर हैं। शहर की झुग्गी बस्ती इलाकों में आज भी महिलाओं और पुरूषों को हाथ में पानी की बोतल या डिब्बा लेकर दिशा मैदान जाते हुए देखा जा सकता है।

समग्र स्वच्छता अभियान के तहत अब तक लाखों – करोड़ों रूपयों की इमदाद हवा में उड़ा दी गयी है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अगर जिला प्रशासन देखना चाहे तो शहर की झुग्गी बस्तियों यहाँ तक कि मुख्य मार्ग के अनेक घरों में जाकर देख सकता है। इन घरों में शौचालय का अता पता नहीं है।

और तो और जिला चिकित्सालय में सुलभ शौचालय होने के बाद भी यहाँ भर्त्ती मरीजों के परिजन सुबह सवेरे शौच के लिये अस्पताल के आसपास के मैदानों का प्रयोग कर रहे हैं। अस्पताल के आसपास मल की दुर्गंध आये दिन आने – जाने वाले नागरिकों को परेशान करती है पर प्रशासनिक अधिकारियों के कानों में इस मामले में जूं भी नहीं रेंग पा रही है।

शहर के अनेक इलाकों यहाँ तक कि जिला चिकित्सालय के आसपास सुबह सवेरे लोग, मैदानों में बैठकर शौच करते दिख जाते हैं। पॉलीटेक्निक कॉलेज के आसपास का इलाका हो या फिर उपनगरीय इलाके हर स्थान पर ही खुले में शौच करते हुए लोगों को देखा जा सकता है।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि शहर में खुले में शौच के लिये लोग क्यों जा रहे हैं इसकी जाँच अवश्य करवायी जाये। अगर वाकई सरकारी स्तर पर शौचालयों के निर्माण का काम पूरा हो चुका है तो खुले में शौच के लिये लोग क्यों और कैसे जा रहे हैं! क्या शहर भर में सुलभ शौचालयों की तादाद पर्याप्त है! अगर नहीं तो नगर पालिका प्रशासन के द्वारा अब तक इस दिशा में ध्यान क्यों नहीं दिया गया!

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