सावधानी, सुरक्षा में पालिका है लापरवाह!

 

सड़कों पर नहीं हैं चमकने वाले संकेतक, आवारा पशु बन रहे समस्या!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सर्दी के मौसम का आगाज हो गया है। रात गहराते ही सुबह तक कोहरे की चादर भी महसूस की जा रही है। शहर के प्रमुख मार्गों में भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा सावधानी और सुरक्षा के किसी तरह के इंतजाम नहीं किये गये हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

शहर भर में आवारा मवेशियों का डेरा है। आवारा पशु, गधे, कुत्ते, सूअर आदि सड़कों पर दिन रात बेखौफ होकर विचरण करते दिख जाते हैं। समस्या तो उस समय होती है जब रात के स्याह अंधेरे में सड़कों पर काले रंगे के जानवर बैठे होते हैं। शीत ऋतु में कोहरे के कारण वैसे भी दृश्यता (विजिबिलटी) कम हो जाती है, उस पर काले रंग के जानवर सड़कों पर दिखायी भी नहीं देते हैं।

ठण्ड के मौसम में नगर पालिका परिषद के द्वारा अलाव की व्यवस्था न किये जाने से लोगों के द्वारा कचरा बीनकर ही उसे जलाया जा रहा है। इस तरह कचरा जलाने से उठने वाला धुंआ भी वातावरण में ज्यादा ऊँचाई तक नहीं जा पाता है और देर रात से पौ फटने तक धुंए की परतें वातावरण में देखी जा सकती हैं।

शहर की मॉडल रोड हो या गणेश चौक से कटंगी नाका या गणेश चौक से बरघाट नाके का मार्ग हर सड़कों पर रात में वाहनों की रोशनी में चमकने वाले संकेतक या तो टूट फूट चुके हैं या गायब हो चुके हैं। रात में वाहन चालकों को इस तरह के चमकने वाले संकेतक के अभाव में वाहन चलाने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।

इतना ही नहीं शहर में लगभग आधा दर्जन स्थानों पर पालिका के द्वारा लगवाये गये यातायात सिग्नल्स में भी जेब्रा क्रॉसिंग नहीं बनाये जाने एवं रात में सड़कों पर चमकने वाले सोलर रोड लेम्पस (जो सड़कों पर गड़ा दिये जाते हैं और रात में ब्लिंक करते हैं) भी नहीं लगाये गये हैं।

शहर में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जिला अस्पताल के पास, सर्किट हाऊस, कचहरी चौक, बीएसएनएल के सामने, बस स्टैण्ड, नगर पालिका तिराहा, छिंदवाड़ा चौक, कटंगी नाका, गाँधी चौक, मिशन कन्या शाला के सामने, गणेश चौक, बाहुबली चौराहा आदि क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

नगर पालिका परिषद के द्वारा शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने, यातायात संकेतक लगाने, ट्रैफिक सिग्नल की संस्थापना आदि के पहले न तो यातायात पुलिस से सलाह मशविरा किया गया और न ही परिवहन विभाग के अधिकारियों से ही किसी तरह का विमर्श किया गया, जिसके चलते इस तरह की परिस्थितियां निर्मित हो रहीं हैं।

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