किसकी गलती से जलावर्धन योजना चल रही विलंब से!

 

 

0 विधायक के बाद अब कलेक्टर . . . 02

बार-बार क्यों बढ़ायी जाती रही योजना की समयावधि

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नवीन जलावर्धन योजना की पूर्णता के लिये जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा 28 फरवरी की डेड लाईन तय तो कर दी गयी है पर इस योजना में अब तक विलंब किस कारण हुआ इस बात की जाँच भी किया जाना आवश्यक है ताकि नागरिकों को हुई परेशानी के लिये जवाबदेही निर्धारित की जा सके।

ज्ञातव्य है कि 2024 तक की सिवनी शहर की आबादी को ध्यान में रखते हुए नब्बे के दशक के आरंभ में बनायी गयी भीमगढ़ जलावर्धन योजना शुरूआत से ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी थी। इस योजना से शहर को दोनों समय पानी दिये जाने का प्रावधान था, किन्तु शहर के लोगों को कभी भी महीने के तीसों दिन भी इस योजना से लगातार पानी नहीं मिल पाया था।

2014 में राजेश त्रिवेदी के नेत्तृत्व वाली भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के कार्यकाल के अंतिम दिनों में इस योजना को परवान चढ़ाया जाना आरंभ किया गया था। वर्तमान नगर पालिका परिषद के द्वारा मार्च 2015 में महाराष्ट्र की मेसर्स लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग कंपनी के साथ इसका अनुबंध किया गया था।

नगर पालिका के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसके उपरांत मार्च 2016 में इस योजना का काम आरंभ किया गया था। इस योजना को 11 माह की अवधि में पूरा किया जाना प्रस्तावित था। इस योजना की समयावधि नगर पालिका के द्वारा किस आधार पर बार – बार बढ़ायी गयी! किस अवधि तक ठेकेदार के द्वारा कितना – कितना काम पूरा किया गया! काम गुणवत्ता के आधार पर हुआ अथवा नहीं! जैसे प्रश्नों के जवाब माप पुस्तिका (एमबी) के अध्ययन से आसानी से मिल सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी किशन सिंह ठाकुर के द्वारा सीएम हेल्प लाईन में की गयी शिकायतों का जवाब भी गोलमोल या झूठा ही दिया जाकर शिकायतों को बंद करवा दिया जाता रहा है। नवनीत पाण्डेय के द्वारा सीएमओ का कार्यभार ग्रहण करते ही उनकी नजरें अवश्य ही इस योजना पर इनायत हुईं थीं।

उल्लेखनीय होगा कि नवनीत पाण्डेय के द्वारा पिछले साल 08 फरवरी को नवीन जलावर्धन योजना का सतही निरीक्षण किया जाकर इसमें पायी गयीं विसंगतियों के लिये शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। इसका जवाब नहीं मिलने पर सीएमओ के द्वारा इस योजना की जाँच किसी तकनीकि समिति से कराये जाने के लिये तत्कालीन जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड को पत्र लिखा गया था।

इस योजना के लिये तत्कालीन जिलाधिकारी गोपाल चंद्र डाड के द्वारा पिछले साल 13 मार्च को एक समिति बनायी जाकर इसकी जाँच समय सीमा में किये जाने के निर्देश दिये गये थे। इसके लिये लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।

इस समिति के द्वारा लंबे समय तक जाँच की जाती रही। इसके द्वारा दिये गये प्रतिवेदन के आधार पर जिला कलेक्टर के द्वारा ठेकेदार कंपनी पर एक करोड़ रूपये का जुर्माना भी ठोका गया था। बाद में राज्य और संभागीय स्तर की तकनीकि जाँच समितियों के द्वारा इस योजना में ठेकेदार को क्लीन चिट दे दी गयी थी।

माना जा रहा है कि यह सारी कवायद भाजपा के शासनकाल में हुई थी। अब जबकि प्रदेश में काँग्रेस सत्ता पर काबिज है तब इस योजना की जाँच बारीकि से इसलिये भी की जा सकती है क्योंकि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कमल नाथ (वर्तमान मुख्यमंत्री) के द्वारा दी गयी केंद्रीय इमदाद के सहारे ही इस योजना के सारे भुगतान किये गये हैं।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *