बांग्लादेशी घुसपैठिये बनाम जिले के कथित चिकित्सक!

 

जिले में फर्जी चिकित्सकों की भरमार, पुलिस के खुफिया तंत्र को लगा लकवा!

(आगा खान)

कान्हीवाड़ा (साई)। जिले भर में बांग्लादेश से आये घुसपैठियों के द्वारा अपनी पैठ बनाकर झोलाछाप चिकित्सकों के रूप में काम किया जा रहा है। इनमें से अधिकांश चिकित्सकों के द्वारा सिवनी का मूल निवास प्रमाण पत्र भी बनवा लिया गया है।

बताया जाता है कि लंबे समय से पुलिस की लापरवाही के चलते बांग्लादेश से आये अनेक नागरिकों के द्वारा सिवनी जिले में अपनी तगड़ी घुसपैठ बना ली गयी है। कान्हीवाड़ा एवं आसपास के क्षेत्रों में बांग्लादेश से घुसपैठ कर आये नागरिकों ने अपनी पैठ बनाकर यहां बंगाली डॉक्टर के रूप में अपनी पहचान बना ली है।

बताया जाता है कि झोलाछाप चिकित्सकों के रूप में सालों से कार्य करने वाले इन घुसपैठियों के खिलाफ न तो पुलिस ने पतासाजी करने का जतन किया और न ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आला अधिकारियों की नजरें ही इन पर इनायत हुईं। इसका लाभ उठाकर इन घुसपैठियों के द्वारा लंबे समय तक सिवनी जिले में निवास करते हुए, यहीं के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के रूप में अपने आप को स्थापित कर लिया गया है।

बताया जाता है कि इनमें से अधिकांश चिकित्सकों के पास तो मिडिल, हाई स्कूल या हायर सेकण्डरी स्कूल की डिग्री तक नहीं है पर इनके द्वारा बीबीएस या बीएएमएस सर्जन जैसी उपाधियों का बोर्ड अपने दवाखानों में लगाकर, निडरता के साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

बताया जाता है कि इन झोला छाप चिकित्सकों के द्वारा छोटी बड़ी शल्य क्रियाएं भी की जाती हैं। इन झोला छाप चिकित्सकों के द्वारा मरीजों का इलाज किया जाता है और जब मरीज की तबियत ज्यादा बिगड़ती है तब ये उसे सरकारी अस्पताल की ओर रवाना करवा देते हैं।

बताया जाता है कि इन झोला छाप चिकित्सकों के द्वारा गर्भपात के काम को बखूबी अंजाम दिया जाता है। लोक लाज के डर से ग्रामीण अंचलों में गर्भपात के लिये भी मनमाने दाम इनके द्वारा वसूल किये जाते हैं।

बताया जाता है कि डॉ.विश्वास, डॉ.शाह, डॉ.सरकार जैसे नामों से दवाखाने संचालित करने वाले इन झोला छाप चिकित्सकों के द्वारा बड़ी ही साफगोई से इस बात को स्वीकार किया जाता है कि इनके पास डिग्री नहीं है। उधर, सरकार के पास चिकित्सक नहीं हैं, जिसके चलते इनका धंधा बेखटके चलता है। ये चिकित्सक खुले रूप में इस बात को भी स्वीकार करते नजर आते हैं कि इनके द्वारा पुलिस और चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों को मोटा पैसा दिया जाता है जिसके चलते कोई भी इनके खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि पुलिस के आला अधिकारियों के द्वारा लंबे समय से इस बात के लिये ताकीद किया जाता है कि जिले में आने वाले लोगों की मुसाफिरी दर्ज की जाये। कहा जा रहा है कि अगर सालों से इस काम को पुलिस के द्वारा बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा रहा होता तो आज यह स्थिति शायद निर्मित नहीं हो पाती।

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