सूखने की कगार पर दिख रही बैनगंगा!

 

प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ रही पुण्य सलिला

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। लाखों करोड़ों लोगों की प्यास बुझाने वाली पुण्य सलिला बैनगंगा नदी गर्मी में सूखती नजर आ रही है। बैनगंगा को संरक्षित करने के लिये गैर सरकारी संगठनों के द्वारा भले ही प्रयास किये गये हों पर प्रशासनिक उदासीनता के चलते बैनगंगा नदी के अस्तित्व पर ही संकट मण्डराता दिख रहा है।

जिले के मुण्डारा से निकली बैनगंगा नदी लखनवाड़ा, परतापुर होते हुए जैसे – जैसे छपारा पहुँचती है वैसे – वैसे इसका पाट (नदी की चौड़ाई) बढ़ते जाता है। छपारा के बाद इस नदी पर एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध (भीमगढ़) बनाया गया है, जो अपने अंदर अकूत जल संग्रह की क्षमता समेटे हुए है।

सालों से बैनगंगा नदी और भीमगढ़ बाँध की किसी के भी द्वारा सुध न लिये जाने से जनवरी के बाद ही बैनगंगा नदी उथली – उथली नजर आने लगती है। जिला प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों की कथित अनदेखी के कारण बैनगंगा नदी के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगते दिख रहे हैं।

सिंचाई विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि हर साल गर्मी के मौसम में बैनगंगा नदी में पानी कम हो जाता है, यहाँ तक कि भीमगढ़ बाँध का जल भराव क्षेत्र भी बारिश के पहले काफी कम हो जाता है। इस लिहाज से हर साल भीमगढ़ बाँध के जल भराव क्षेत्र से सिल्ट निकाली जाना चाहिये ताकि भीमगढ़ बाँध की जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाया जा सके।

सूत्रों ने कहा कि सांसद और विधायक अगर चाहते तो हर साल सांसद या विधायक निधि से ही बैनगंगा नदी पर निर्धारित दूरी के स्थान – स्थान पर छोटे – छोटे स्टॉप डेम तैयार करवा दिये जाते जिससे बारिश के समय बैनगंगा नदी में आने वाले पानी को सहेजा जा सकता था। इससे कुछ – कुछ दूरी पर पानी की उपलब्धता रहती और आसपास ग्राउंड लेवल वाटर रिचार्ज भी हो जाता।

वर्तमान में मुण्डारा से लेकर लखनवाड़ा, परतापुर होकर छपारा तक के बैनगंगा नदी के हिस्से में नदी पूरी तरह सूखी ही दिख रही है। स्थान – स्थान पर पानी के छोटे – छोटे डबरे ही दिखायी दे रहे हैं, जो मई के अंत तक सूख सकते हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों की कथित अनदेखी के कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है।

किसानों का कहना है कि सांसद और विधायकों की अनदेखी के कारण हर साल फरवरी माह के बाद ही बैनगंगा नदी में जलस्तर घटने लगता है और मई के समाप्त होते – होते पानी का बड़ा संकट आन खड़ा होता है। किसानों ने संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से अपेक्षा व्यक्त की है कि वे ही स्वसंज्ञान से बैनगंगा नदी को जीवन दान देने के उपाय करने के साथ ही साथ भीमगढ़ बाँध के जलभराव क्षेत्र में अब सूख चुके स्थान से सिल्ट हटवाने के लिये सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करें ताकि आने वाले सालों में गर्मी में पानी के संकट से निपटा जा सके।

 

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