जिले में धड़ल्ले से जारी है ट्यूशन का व्यवसाय!

क्या हुआ सरकारी शिक्षकों के ट्यूशन न पढ़ाने के फरमान का?

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। लगता है शिक्षा विभाग के द्वारा समय – समय पर निर्धारित फॉर्मेट में आदेश जारी करने की रस्म अदायगी करना बहुत ही बेहतर तरीके से आता है। शाला में प्रचलित कॉपी किताबें, गणवेश आदि की आठ दुकानों का फरमान हो या शासकीय शिक्षकों के ट्यूशन पर प्रतिबंध का आदेश हो, हर आदेश जारी कर शिक्षा विभाग मानो भूल जाता है।

ज्ञातव्य है कि हर साल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के द्वारा सरकारी और गैर सरकारी शिक्षकों का ट्यूशन पढ़ाना प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इसके लिये निरीक्षण दल का गठन भी किया जाता है। वहीं सरकारी और गैर सरकारी शालाओं के बारे में विसंगतियां बरकरार ही प्रतीत हो रहीं हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि डीईओ कार्यालय में समय – समय पर महज रस्म अदायगी के लिये ही आदेश जारी कर ट्यूशन को प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इस आदेश के जारी करने के बाद शायद ही कोई जानता हो कि इसके पालन के लिये किसी तरह के प्रयास किये गये हों।

सूत्रों ने कहा कि अब जबकि वार्षिक परीक्षाएं सिर पर आ चुकी हैं तब भी सरकारी और निजि शालाओं में ट्यूशन का व्यवसाय जमकर फल फूल रहा है। कहा तो यहाँ तक भी जा रहा है कि जो विद्यार्थी ट्यूशन जाते हैं उन्हें परीक्षा के पहले ही कुछ चिन्हित प्रश्नों को बता दिया जाता है और इनमें से अधिकांश प्रश्न ही परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

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