ई अटेंडेंस से दम फूला शिक्षकों का!

(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। स्कूल शिक्षा विभाग में सोमवार से एक बार फिर लागू की गयी ई-अटेंडेंस व्यवस्था के हालात तीन साल बाद भी जस के तस हैं। ई-अटेंडेंस में खास सुधार नहीं आ पाया है। सुबह – सुबह स्कूल पहुँचे अधिकांश शिक्षक, कर्मचारियों को ई-अटेंडेंस की तकनीकी खामियों से जूझना पड़ा।
शहरी क्षेत्र में तो अटेंडेंस को लेकर ज्यादा समस्या नहीं आयी, लेकिन ग्रामाीण इलाकों में ई-अटेंडेंस ने शिक्षकों का पसीना छुटा दिया। अनेक शालाओं में नेटवर्क या इंटरनेट की स्पीड न मिल पाने से उन्हें खासी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके चलते शिक्षकों ने अध्यापन कार्य को प्राथमिकता न देते हुए पहले अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को ही प्राथमिकता दी।
बताया जाता है कि अनेक शालाओं में शिक्षक सहित प्राचार्य बार-बार अटेंडेंस लगाते रहे, लेकिन अटेंडेंस शो नहीं हो रही थी। बाकी स्कूलों में कहीं 09 बजे लगायी गयी अटेंडेंस का टाईम एम शिक्षा मित्र एप्प में 11 बजे का दिख रहा था, तो कहीं स्कूल से अटेंडेंस लगाने पर भी एप्प में उनकी स्कूल से दूरी 02 से 03 किलोमीटर दिख रही थी। बताया जाता है कि इस तरह की समस्याएं सर्वर की प्रॉब्लम के चलते सामने आ रहीं थीं।
एम शिक्षा मित्र का नया वर्जन भी बेअसर : शिक्षकों का कहना था कि ई-अटेंडेंस के लिये एम शिक्षा मित्र के नये अपडेट वर्जन 6.2 को लॉन्च किया गया है, लेकिन ई-अटेंडेंस के मेन सर्वर में आ रही तकनीकी खामियों से ये वर्जन भी काम नहीं कर रहा। अनेक क्षेत्रों में नेटवर्क न मिलने या इंटरनेट स्लो चलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
2015 से लागू, कब-कब हुई बंद : शिक्षक, कर्मचारियों को समय पर स्कूल पहुँचाने के लिये ई-अटेंडेंस व्यवस्था सितंबर 2015 में आरंभ की गयी थी। नेटवर्क, अक्षांश – देशांश (स्कूल से दूरी) पासवर्ड जैसी तकनीकी समस्या के चलते ये प्रभावी नहीं हो सकी। 2016 में अध्यापकों की जनहित याचिका पर ग्वालियर हाई कोर्ट ने ई-अटेंडेंस पर रोक लगा दी थी। 2017 में फिर इसे सख्ती से लागू किया गया। एक अपै्रल 2018 को मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद फिर अटेंडेंस व्यवस्था ठण्डे बस्ते में चली गयी। इसके बाद फिर इसे 11 जून से पुनः लागू कर दिया गया है।

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