एससी एसटी एक्ट पर बोले शिवराज

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर सामान्य वर्ग द्वारा किए जा रहे चौतरफा विरोध के आगे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह घुटने टेकते नजर आ रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को बालाघाट में ऐलान किया कि वह मध्य प्रदेश में इस ऐक्ट दुरुपयोग नही होने देंगे। इस ऐक्ट के तहत आने बाली शिकायतों की जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।

चौथी पारी के लिये प्रदेश की जनता से आशीर्वाद मांगते घूम रहे शिवराज गुरुवार को बालाघाट जिले में थे। वहां उन्होंने कहा कि एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर हम दिशा निर्देश जारी करेंगे। राज्य में इस ऐक्ट के दुरुपयोग नहीं होने देंगे। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि कानून में बदलाव नहीं होगा। शिवराज का यह बयान सवर्णों के बढ़ते गुस्से को रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इस समय पूरे प्रदेश में सामान्य वर्ग के लोग बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं का विरोध कर रहे हैं। बुधवार को जहां इंदौर में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के घर पर विरोध प्रदर्शन हुआ वहीं ग्वालियर में सांसद अनूप मिश्रा को भी घेर कर काले झंडे दिखाए गए। इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के अलाबा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर को भी काले झंडे दिखाए जा चुके हैं। विरोध की स्थिति यह है कि शिवराज के कई मंत्री अपने इलाकों में जाने से बच रहे हैं। पिछले सप्ताह भिंड में लोगों ने मंत्री लाल सिंह आर्य को एक कार्यक्रम से लौटने को विवश कर दिया था।

गुरुवार को भोपाल में इस ऐक्ट के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी शिवराज के करीबी मंत्री रामपाल सिंह के घर में घुस गए। वहां पुलिस ने उनकी जमकर धुनाई कर दी। पुलिसबलों ने तिलकधारी प्रदर्शनकारियों को लात जूतों से पीटा। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। ऐक्ट के विरोध में शुक्रवार को उज्जैन में एक बड़ा सम्मेलन बुलाया गया। इससे पहले पदोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रहे सरकारी कर्मचारियों ने उज्जैन में एक बड़ी रैली की थी।

हालत यह है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी एक ही नाव पर सवार हैं, इसलिए दोनों ही निशाने पर हैं। शिवराज की चिंता इसलिए और ज्यादा है, क्योंकि इस ऐक्ट का विरोध पिछड़े वर्ग द्वारा भी किया जा रहा है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इसको लेकर खासी नाराजगी है। शिवराज के आज के बयान से यह माना जा रहा है कि बीजेपी को इस बात का एहसास हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में फेरबदल का फैसला उसे भारी पड़ सकता है। इसी बजह से वह डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रही है।

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