सोशल मीडिया पर दनादन प्रचार

निगरानी अब तक आरंभ नहीं कर पायी कमेटी

(ब्यूरो कार्यालय)

ग्वालियर (साई)। विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरे प्रत्याशी सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार कर रहे हैं। अपने जनसंपर्क से लेकर सभा तक प्रत्याशी अपलोड करवा रहे हैं। सोशल मीडिया पर दनादन प्रचार का सिलसिला जारी है और इधर अभी तक उनके खातों पर सीधे निगरानी ही आरंभ नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर प्रचार को किस अनुपात में मापा जायेगा, इसकी गाइड लाइन ही अभी आयोग से नहीं आयी है। विधानसभा आम निर्वाचन के दौरान जिले में केवल चैनलों एवं एफएम रेडियो से प्रसारित कार्यक्रमों पर 24 घण्टे नजर रखने का दावा किया जा रहा है।

मोती महल स्थित संभागीय जनसंपर्क कार्यालय परिसर में जिले के सभी विधासभा निर्वाचन क्षेत्रों का इकजाई मीडिया अनुवीक्षण कक्ष स्थापित किया गया है। ग्रामीण व ग्वालियर के लिये नियुक्त व्यय प्रेक्षक अजितेष राधाकृष्णन ने गत दिवस मोती महल पहुँचकर मीडिया अनुवीक्षण प्रकोष्ठ का औचक निरीक्षण किया।

व्यय प्रेक्षक ने लोकल केबल नेटवर्क और एफएम चैनल पर प्रसारित हो रही चुनावी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की कार्यवाही देखी। साथ ही सामचार पत्रों में से की जा रही चुनाव से संबंधित कतरने देखीं। उन्होंने कहा कि सभी संदिग्ध कतरनों को एमसीएमसी समिति की बैठक में रखें। खबरें पेड न्यूज साबित होने पर त्वरित कार्यवाही कर उनका व्यय संबंधित प्रत्याशी के खाते में जुड़वायें।

ज्ञातव्य है कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों के तहत पेड न्यूज पर नजर रखने के लिये जिला स्तर पर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में मीडिया अनुवीक्षण एवं प्रमाणन समिति (एमसीएमसी) गठित की गयी है। आयोग ने पेड न्यूज पर बारीकी से ध्यान देने के निर्देश दिये हैं।

एमसीएमसी द्वारा मीडिया सैल (मीडिया अनुवीक्षण प्रकोष्ठ) के जरिये 24 घण्टे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया द्वारा प्रसारित होने वाली खबरों की गहन छानबीन की जा रही है। पेड न्यूज साबित होने पर संबंधित प्रत्याशी के निर्वाचन व्यय में पेड न्यूज प्रकाशन पर हुआ खर्च जोड़ा जायेगा।

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