अब पीड़ितों को सरकार देगी 10 लाख का मुआवजा, नया नियम लागू

 

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। प्रदेश में यौन अपराधों के शिकार नाबालिगों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की यौन व अन्य अपराधों की पीड़ित महिला को क्षतिपूर्ति योजना 2018 के तहत मुआवजा मिलेगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश जारी कर योजना तत्काल लागू करने को कहा है। पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीशों से कहा गया है कि वे नाबालिग यौन अपराध पीड़तों को योजना के तहत क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए उचित आदेश जारी करें। योजना में गैंगरेप से पीड़ित को 10 लाख रुपए तक क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए दिशा-निर्देश : सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान सभी अपराध पीड़ित महिलाओं व यौन अपराध के शिकार बच्चे-बच्चियों को उक्त अपराध के चलते शारीरिक, मानसिक पीड़ा व अन्य नुकसान की भरपाई के समुचित वैधानिक प्रावधान न होने पर चिंता जताई थी।

कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को पांच सदस्यीय समिति गठित कर योजना बनाने को कहा था। प्राधिकरण की योजना को सुको ने गत पांच सितम्बर को अनुमोदित कर दिया था। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि जब तक केंद्र सरकार यौन अपराधों के शिकार नाबालिगों के लिए क्षतिपूर्ति के सम्बंध में वैधानिक प्रबंध नहीं करती, तब तक यह योजना इस सम्बंध में गाइडलाइन का काम करेगी। इसे दो अक्टूबर से पूरे देश में लागू करने के लिए कहा था।

बनेगा फंड, तत्काल मिलेगी अंतरिम मदद : योजना के तहत महिला अपराध पीड़ित फंड बनाया जाएगा। इस फंड में केंद्र, राज्य सरकार के अनुदान के अलावा निजी कंपनियों से कार्पाेरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत प्राप्त रकम, सिविल-आपराधिक अधिकरणों की ओर से पक्षकारों पर लगाई गई कॉस्ट की राशि, अंतराष्ट्रीय-राष्ट्रीय चौरिटेबल संस्थाओं की मदद शामिल होगी।

नाबालिग यौन अपराध पीड़ितों को अधिकृत हर्जाने की राशि में से 25 फीसदी तक या दस हजार रुपए अंतरिम राहत के तौर पर दिया जाएगा। जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उक्त फंड में से यह मदद कर सकेगा। एसिड अटैक व गम्भीर मामलों पर जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण स्वतः संज्ञान पर भी पीड़ितों की मदद कर सकेंगे।

इन आधारों पर मिलेगा मुआवजा : मुआवजे के निर्धारण के लिए आधार नियत किए गए हैं। इनमें पीड़ित की आर्थिक दशा, अपराध, शारीािरक-मानसिक हानि या चोट की गम्भीरता, मेडिकल ट्रीटमेंट में सम्भावित खर्च, काउंसिलिंग, जांच व विचारण के लिए आने-जाने का खर्च, पीड़ित के शैक्षणिक, रोजगार के अवसरों की हानि, अपराधी से रिश्ता, पीड़ित को हुए यौन जनित रोग, एचआइवी संक्रमण, विकलांगता मुख्य हैं। इसके अलावा यौन अपराध की निरंतरता भी देखी जाएगी।

यहां कर सकते हैं आवेदन : यौन अपराध पीड़ित नाबालिग अपराध होने या विचारण खत्म होने के तीन माह तक क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन दे सकते हैं। आवेदन सम्बंधित कोर्ट के समक्ष या राज्य-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को किया जा सकता है। पीड़ित बच्ची हो या बच्चा यह मायने नहीं रखेगा।

नाबालिग के साथ अपराध होने पर मृत्यु होने पर 05 से 10 लाख रूपए, गैंगरेप होने पर 05 से 10 लाख रूपए, रेप होने पर 04 से 07 लाख रूपए, अप्राकृतिक यौन अपराध 04 से 07 लाख रूपए, यौन अपराध के कारण शारीरिक व मानसिक विकलांगता पर 01 से 05 लाख रूपए, गंभीर शारीरिक या मानसिक चोट 01 से 02 लाख रूपए, यौन अपराध से गर्भपात, गर्भधारण क्षमता खत्म होने पर 02 से 03 लाख रूपए, रेप से गर्भधारण पर 07 से 08 लाख रूपए एवं एसिड अटैक पर 03 से 08 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

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