गलत ढंग से छूने पर हो सकती है 05 साल तक की जेल

 

(ब्यूरो कार्यालय)

नयी दिल्ली (साई)। दुनिया के चौधरी अमेरिका सहित तमाम दुनिया में पिछले साल मीटू मूवमेंट की बाढ़ आ गयी थी। कई नामी चेहरों ने अपने साथ हुए हैरसमेंट के बारे में खुलकर बात की।

नाना पाटेकर – तनुश्री दत्ता के विवाद के बीच भारत में भी यह मूवमेंट तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है लेकिन इस बीच सबसे ज्यादा बात यह उठ रही है कि इसको लेकर कानूनी तौर पर क्या किया जा सकता है? यौन उत्पीड़न या सेक्शुअल हैरसमेंट न केवल नैतिकता के पैमाने पर बल्कि कानूनी तौर भी गलत है। इसको लेकर भारत में कई स्तर पर कड़े कानून मौजूद हैं।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा विशाखा गाईड लाईंस 1997 में जारी की गयी थी। इसके बाद इनके बदले दिसंबर 2013 में प्रीवेंशन ऑफ सेक्शुअल हैरसमेंट ऑफ विमेन एट वर्कप्लेस एक्ट लागू किया गया था और साथ ही क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट (अपराधी कानून अधिनियम) 2013 भी सेक्शुअल हैरसमेंट को लेकर काफी सख्त कानून है। इन कानूनों में सेक्शुअल हैरसमेंट के तहत आने वाले अलग – अलग अपराधों के हिसाब से सजा का विधान है।

गौर करने वाली बात यह है कि कई बार पीड़ित को अपने साथ हो रहे अन्याय का एहसास होते हुए भी यह पता भी नहीं होता कि वे सैक्शुअल हैरसमेंट के खिलाफ कानूनी तौर पर क्या कार्रवाही कर सकते हैं इसलिये हम आपको बता रहे हैं उन कानूनों के बारे में जो सेक्शुअल हैरसमेंट से जुड़े हैं..

अपराधी कानून अधिनियम 2013 के तहत किसी महिला को गलत ढंग से छूने या बिना सहमति के छूने पर 1-5 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

किसी महिला की सहमति या उसकी जानकारी के बिना उस पर नजर रखना, तस्वीरें लेना आईटी एक्ट 2000 के तहत कानूनी तौर पर 1-7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिये प्रयोग में लाये गये शब्दों या इशारे करने के लिये अपराधी कानून अधिनियम 2013 के तहत अधिकतम 03 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।

भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 के तहत भी सैक्शुअल हैरसमेंट की शिकायत दर्ज की जा सकती है जिसके लिये अपराधी को 05 साल तक की सजा हो सकती है।

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