जानें कैसे होता है तूफानों का नामकरण

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भुवनेश्वर (साई)। बंगाल की खाड़ी में बन रहे दबाव के कारण आये चक्रवात तूफान तितली ने बुधवार को प्रचण्ड रूप धारण कर लिया है। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार तक 145 किलोमीटर प्रति घण्टा की रफ्तार से हवाएं चलने के आसार हैं। यह तूफान ओडिशा और आंध्र तट की ओर बढ़ रहा है। अक्सर आपने तूफानों के रोचक नाम सुने होंगे। जैसे – हुदहुद, लैला, निलोफर, वरदा आदि।

तूफानों के नाम रखने की मुख्य वजह है कि इनको लेकर आम लोग और वैज्ञानिक स्पष्ट रह सकें। क्या आप जानते हैं कि इन तूफानों का नामकरण कैसे होता है? आईये हम बताते हैं :-

एटलांटिक क्षेत्र में तूफानों के नामकरण की शुरुआत 1953 की एक संधि से हुई। हालांकि, हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर इन तूफानों के नामकरण की व्यवस्था 2004 में आरंभ की। इन आठ देशों में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, थाईलैंड और श्रीलंका शामिल हैं।

कुछ यूँ रहे हैं चर्चित तूफानों के नाम : 32 तूफानों की सूची में भारत द्वारा दिये गये चार नाम – लहर, मेघ, सागर और वायु हैं। काफी चर्चा में रहे तूफान हेलेन का नाम बांग्लादेश ने, नानुक का म्यांमार ने, हुदहुद का ओमान ने, निलोफर और वरदा का पाकिस्तान ने, मेकुनु का मालदीव ने और हाल में बंगाल की खाड़ी से चले तूफान तितली का नाम पाकिस्तान द्वारा दिया गया है।

आने वाले तूफानों में गाजा, फेथाई, फानी, वायु, हिक्का, क्यार, माहा, बुलबुल, पवन और अम्फान हैं। यहाँ यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी तूफान उत्तरी हिंद महासागर से संबंधित हैं।

सुदूर इलाकों में भीषण बारिश की आशंका : अनुमान है कि तितली चक्रवात गोपालपुर और कलिंगपटनम के बीच गुरुवार सुबह दस्तक देगा, जिसकी वजह से तेज बारिश और 125 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग ने रेड एलर्ट वाले जिलों में भारी से बेहद भारी बारिश और राज्य के सुदूर इलाकों में भीषण बारिश की आशंका जतायी है।

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