आर्मी जवान खुद कर रहे हैं इनोवेशन, बनाया ग्रेनेड फेंकने वाला ड्रोन

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

नई दिल्‍ली (साई)। इंडियन आर्मी न सिर्फ इंडस्ट्री को इनोवेशन के लिए प्रोत्साहित कर रही है बल्कि आर्मी के जवान खुद भी इनोवेशन कर रहे हैं। ऑपरेशनल एरिया की जरूरतों को देखते हुए कई इनोवेशन किए गए हैं जिन्हें आरटेक सेमिनार ( आर्मी टेक्नॉलजी सेमिनार) में डिस्प्ले किया गया।

आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने भी इनोवेशन पर जोर देते हुए कहा कि मिलिट्री अफेयर्स में अगली क्रांति टेक्नॉलजी और टेक्नॉलजी में इनोवेशन से ही तय होगी। जनरल रावत ने कहा कि हमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और बिग डेटा ऐनालिटिक्स पर काम करना चाहिए। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को लेकर अभी भी धुंधलापन है। अगर हमने अभी इस दिशा में काम करना शुरू नहीं किया तो बहुत देर हो जाएगी क्योंकि दुनिया में कई देश और हमारे विरोधी देश भी इसमें आगे बढ़ रहे हैं और बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं।

ड्रोन से गिरा रहे हैं ग्रेनेड

आरटेक सेमिनार में ग्रेनेड रिलीज मैकेनिजम के साथ क्वाडकॉप्टर (चार रोटर्स वाला अनमेन्ड हेलिकॉप्टर यानी ड्रोन) भी डिस्प्ले किया गया है। 21 सिख रेजिमेंट के सिपाही गुरप्रीत और अमरीक सिंह ने तैयार किया है। अमरीक ने बताया कि इसमें हमारे कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष मेहता ने इसके लिए पूरा सपोर्ट दिया। कुछ वक्त पहले तक क्वॉडकॉप्टर को निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था लेकिन इसमें मॉडिफिकेशन कर इसमें वेपन सिस्टम जोड़ा गया है। अब इससे ऑपरेशन एरिया में किसी टारगेट को बर्बाद करने के लिए ग्रेनेड रिलीज कर सकते हैं। एक साथ यह तीन ग्रेनेड गिरा सकता है या फिर 2 किलो तक की आईईडी भी इससे गिराई जा सकती है। इमरजेंसी सिचुएशन में फर्स्ट ऐड भी इससे ड्राप कर सकते हैं। इस आर्म्ड ड्रोन का इस्तेमाल अब तक 2 बार कश्मीर की ऑपरेशनल एरिया में किया गया है। एक बार बॉर्डर पार भी इसका इस्तेमाल हुआ है। यह रिमोट के जरिए कंट्रोल होता है और इसे ऑटोमेटेड मोड पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मैप पर लोकेशन सिलेक्ट कर यह ड्रोन तय जगह पर ग्रेनेड गिरा कर वापस आ सकता है। ग्रेनेड की रेडियस 8 मीटर तक है। इसमें विजन डिवाइस भी है और नाइट विजन भी है। ताकि रियल टाइम अपडेट मिलता रहे।

ताकि कर सकें तुरंत रिस्पॉन्स

इंडियन आर्मी में लेफ्टिनंट कर्नल विकास चतुर्वेदी ने सतर्क नाम से एक एंड्रॉयड बेस्ड मोबाइल ऐप डिवेलप की है। इसके जरिए ड्यूटी पर तैनात जवान के हाथ में मौजूद एक डिवाइस पर बटन दबाते ही उन सभी के पास अलार्म बज उठेगा जो इस ऐप में रजिस्टर्ड हैं। इसका इस्तेमाल दिल्ली और मेरठ में आर्मी के कई संस्थानों में होने लगा है। इस ऐप के जरिए तुरंत रिसपॉन्स सुनिश्चित किया जा रहा है। अगर कहीं पर टेरर अटैक होता है तो तुरंत इसकी जानकारी रिएक्शन टीम तक पहुंचाने के लिए यह ऐप काफी उपयोगी है। अटैक की स्थिति में ड्यूटी पर तैनात जवान बस एक बटन दबाएगा और तुरंत इस ऐप में रजिस्टर्ड टीम के फोन पर अलार्म बज उठेगा साथ ही उनके पास लोकेशन भी पहुंच जाएगी, ताकि वह तुरंत वहां पहुंच सकें और लोगों की इसकी जानकारी दे सकें ताकि कम से कम नुकसान हो। इसके लिए इंटरनेट जरूरी नहीं है और यह जीएसएम सर्विस पर काम करता है।

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