किसी भी जाति का व्यक्ति बन सकता है मंदिर का पुजारी  – हाई कोर्ट

 

(ब्यूरो कार्यालय)

नैनीताल (साई)। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा है कि योग्यता पूरी करने वाला किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिर का पुजारी बन सकता है और मंदिर में नियुक्त श्ऊंचीश् जाति का कोई पुजारी अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी भक्त को पूजा करने से रोक नहीं सकता है।

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की अदालत ने ये आदेश अनुसूचित जाति और जनजातियों के व्यक्तियों के मंदिरों में जाने और धार्मिक गतिविधियों के अधिकारों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख नियत करते हुए गढ़वाल आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहने के भी निर्देश दिए। याचिका में कहा गया है कि हरिद्वार में श्ऊंचीश् जातिवाले पुजारी श्निचलीश् जातिवाले भक्तों से भेदभाव करते हैं और उनकी तरफ से धार्मिक गतिविधियां करने से मना करते हैं।

अदालत ने ऊंची जाति वाले पुजारियों से सभी मंदिरों में निचली जातियों के सदस्यों की तरफ से पूजा समारोह कराने से इनकार न करने के निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूरे प्रदेश में किसी भी जाति से संबंधित सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के मंदिर में जाने की अनुमति है और सही तरीके से प्रशिक्षित और योग्य किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिरों में पुजारी हो सकता है।

 

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