इस बार मानसून में अच्छी बारिश के आसार

(रश्मि कुलश्रेष्ठ)

नई दिल्ली (साई)। मानसून के चार महीनों के दौरान इस साल अच्छी बारिश के आसार हैं। यह बात आम लोगों, किसानों और यहां तक की सरकार के लिए भी राहत पहुंचाने वाली हो सकती है। अगले साल होने वाले आम चुनावों से ठीक पूर्व किसानों को बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून को प्रभावित करने वाला कारक लॉ नीना मेहरबान है।

मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने बताया कि प्रशांत महासागर में विषुवत रेखा के निकट समुद्र के तापमान में कमी बनी हुई है। अभी यह तापमान -.5 डिग्री से भी कम है। जून तक इसमें कोई बदलाव की उम्मीदें भी नहीं हैं। यहां पर समुद्र की सतह ठंडी होने से लॉ नीना प्रभाव उत्पन्न होते हैं। जिससे विषुवत रेखा के इर्द-गिर्द चलने वाली हवाओं ट्रेड विंड के दबाव में तेजी आती है। यह अच्छे मानसून का प्रतीक हैं।

रमेश के अनुसार जून के बाद तापमान में थोड़ा परिवर्तन आएगा। लेकिन तब भी यह .5 डिग्री से ज्यादा नहीं रहेगा। इस स्थिति को हम तटस्थ मानते हैं। इसलिए मानूसन के मोर्चे पर अच्छे संकेत हैं। रमेश हालांकि स्पष्ट करते हैं कि लॉ नीना का मानसून के हक में होना एक अच्छा संकेत है। लेकिन मानूसन को प्रभावित करने वाले कई अन्य कारक भी है जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। इसी महीने मौसम विभाग मानसून का आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करेगा।

लॉ नीना का असर : वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका के निकट खासकर पेरू वाले क्षेत्र में यदि विषुवत रेखा के ईर्द-गिर्द समुद्र की सतह अचानक गरम होनी शुरू हो जाए तो अलनीनो बनता है। यदि तापामान बढ़ोत्तरी 0.5 डिग्री से 2.5 डिग्री के बीच हो तो मध्य एवं पूर्वी प्रशांत महासागर में हवा के दबाव में कमी आने लगती है।

इससे विषुवत रेखा के इर्द-गिर्द चलने वाली ट्रेड विंड कमजोर पड़ने लगती हैं। यही हवाएं मानसूनी हवाएं हैं जो भारत में बारिश करती हैं। लेकिन कभी-कभी उक्त स्थान पर सतह ठंडी होने लगी है। ऐसी स्थिति में अल नीनो से विपरीत घटना होती है जिसे लॉ-नीना कहा जाता है।

लॉ नीना बनने से हवा के दबाव में तेजी आती है और ट्रेड विंड को रफ्तार मिलती है। जो भारतीय मानसून पर अच्छा प्रभाव डालती है। उदाहरण के लिए 2009 में अल नीनो के कारण कम बारिश हुई जबकि 2010 एवं 2011 में लॉ नीना से अच्छी बारिश हुई।

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