. . . इसलिए घटा स्‍मृति ईरानी का कद

 

(रश्मि कुलश्रेष्‍ठ)

नई दिल्ली (साई)। स्मृति ईरानी का सूचना एवं प्रसारण मंत्री के तौर पर कार्यकाल एक साल से भी कम का रहा, हालांकि यह समय भी विवादों से भरपूर था। स्मृति ईरानी ने मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय का पदभार दो साल पहले छोड़ा था, लेकिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का पूरा जिम्मा उन्हें सितंबर 2017 में मिला। वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले पीयूष गोयल को लगातार बड़ी जिम्मेदारी मिलती गई। इस बार उन्हें वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

विवादों की शरुआत सूचना प्रसारण मंत्रालय के उस आदेश से हुई, जिसमें 40 इन्फॉर्मेशन सर्विस ऑफिसर्स के तबादले की बात कही गई थी। इस आदेश के बाद अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद पब्लिक ब्रॉडकास्टर कर्मचारियों की संख्या कम करने, मैनेजमेंट फंड, डीडी के फ्री डिश और स्लॉट सेल पॉलिसी को लेकर प्रसारभारती के चेयरमैन ए सूर्य प्रकाश के साथ विवाद होना। सूर्य प्रकाश पूर्व पत्रकार हैं, और आरएसएस के करीबी माने जाते हैं। इसके बाद मंत्रालय की तरफ से आदेश आया जिसे लेकर काफी विवाद हुआ। आदेश में कहा गया कि गलत जानकारी देने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। हालांकि पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद इस आदेश को कैंसल कर दिया गया।

पिछले एक हफ्ते में मंत्रालय को दो और विवादों का सामना करना पड़ा। एक विवाद राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के प्रजेंटेशन के दौरान हुआ। मंत्रालय पर आरोप लगा कि उसने राष्ट्रपति को कार्यक्रम के बारे में सही जानकारी नहीं दी। अवॉर्ड पाने वाले कई लोगों ने विरोध किया, क्योंकि राष्ट्रपति सिर्फ 16 लोगों को ही अवॉर्ड देने वाले थे। इसके बाद राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता की तरफ से जानकारी आई कि उसने मंत्रालय को दो हफ्ते पहले ही जानकारी दे दी थी कि राष्ट्रपति सिर्फ 1 घंटे के लिए ही कार्यक्रम में रहेंगे। इस हफ्ते दूसरा विवाद एशियी मीडिया समिट के दौरान हुआ, जब कुछ इंटरनैशनल गेस्ट के लिए सही इंतजाम नहीं करने की बात सामने आई।

सूत्रों की मानें तो, ईरानी के एक अच्छा वक्ता होने की वजह से उनसे उम्मीद की जा रही थी, वह मीडिया और अन्य सहयोगियों के साथ गैर-विवादित संबंध स्थापित कर पाएंगी। सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय इस पद पर ऐसे व्यक्ति को चाहता था, जो सबको साथ लेकर चल सके। ऐसे में नैशनल फिल्म डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन की प्रमुख नीना लाथ गुप्ता और फिल्म फेस्टिवल के निदेशक सेनथिल कुमार को हटाने का फैसला स्मृति ईरानी के खिलाफ गया। सीबीएफसी के चेयरमैन पहलाज निहलानी को हटाकर प्रसून जोशी को उस पद की जिम्मेदारी देने का काम भी स्मृति ईरानी के कार्यकाल में हुआ।

इन तमाम विवादों के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रासलय में अब तक राज्य मंत्री रहे राज्यवर्धन सिंह राठौर को मंत्रालय की पूरी जिम्मेदारी दे दी गई है।

वहीं पीयूष गोयल को नई जिम्मेदारी मिलना साफ बता रहा है कि पार्टी उन पर ज्यादा भरोसा कर रही है। रेलवे और कोयला मंत्रालय के साथ उन्हें अस्थायी तौर पर वित्त मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वित्त मंत्री के तौर पर अब पीयूष गोयल अब सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमिटी का भी हिस्सा होंगे। इस क्लब में पीएम के अलावा, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री होते हैं।

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