दूसरे को देख क्यों आती है उबासी!

 

 

 

 

पूर्वजों से जुड़ा हुआ है सच

अक्सर आपने ऐसा देखा होगा कि किसी एक को जम्हाई या उबासी लेते हुए जब कोई दूसरा देख लेता है तब वह भी जम्हाई लेने लगता है।

ज्यादातर लोगों का यह मानना है कि जब इंसान को नींद आती है तब वह जम्हाई लेता है जबकि होता बिल्कुल इसके विपरीत है। जम्हाई हम उस वक्त लेते हैं जब दिमाग को एक्टिव करने के लिये बॉडी नींद को दूर करता है।

अब सवाल यह आता है कि क्या वाकई में जम्हाई छुआछूत है? क्यों किसी को उबासी लेते देख हम भी वैसा ही करने लगते हैं? साल 2013 में म्यूनिख में साइकियाट्रिक यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ने इस बात का पता लगाने के लिये एक रिसर्च किया। इसके तहत लगभग तीन सौ लोगों को शामिल किया गया और उन्हें ऐसा वीडियो दिखाया गया जिसमें लोग केवल जम्हाई ले रहे थे।

इस वीडियो को देखने के दौरान ज्यादातर लोगों ने एक से पंद्रह बार तक उबासी ली। वैज्ञानिकों ने पाया कि जब हम किसी को जम्हाई लेते देखते हैं तो ह्यूमन मिरर न्यूरॉन सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। यह विशेष तंत्रिकाओं का एक समूह होता है जो हमें दूसरों के व्यवहार को देख उसकी नकल करने के लिये हमें प्रेरित करता है।

इसके संक्रामक होने के पीछे एक और कारण है। दरअसल, प्राचीन जमाने में जब आदिवासी झुण्ड बनाकर रहते थे तो जब भी उन्हें खतरे का आभास होता था तब एक – दूसरे को सर्तक करने के लिये जम्हाई लेते थे। इससे आवाज भी नहीं होती थी और सभी सजग भी हो जाते थे। यानि कि एक तरह से यह इशारे का काम करता था। मनोवैज्ञानिकों का तो यह भी कहना है कि किसी तरह की चिंता या सोच से गुजरने के बाद भी हम उबासियां लेते हैं।

(साई फीचर्स)

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