गर्भावस्था में मोटापे से शिशु की सेहत पर हो सकता है असर . . .

 

यह तो हम सभी जानते हैं कि गर्भावस्था में मां की सेहत का गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। फ्रांस में हुए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने कहा है कि इस दौरान मां का वजन बढ़ना सामान्य है, मगर मोटापे से शिशु की सेहत भी प्रभावित होती है।

फ्रांस के संस्थान सेंटर हॉस्पिटलियर यूनिवर्सिटेयर सुद रीयूनियन में हुए शोध में कहा गया है कि गर्भावस्था में मां के अत्यधिक वजन से बच्चे का वजन प्रभावित हो सकता है। वह बहुत अधिक या बहुत कम वजन का हो सकता है। शोधकर्ताओं की टीम ने एक ऑनलाइन कैलकुलेटर बनाया है, जो महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए आदर्श वजन के बारे में सलाह देगा। यह सलाह शोध पर आधारित होग।

प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर पियरे येव रोबिलार्ड ने कहा कि हमारे शोध के नतीजों से धरती पर हर साल गर्भवती होने वाली 13़5 करोड़ महिलाओं को फायदा होगा। महिलाएं जानना चाहती हैं कि सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भावस्था के दौरान उनका वजन अधिकतम कितना बढ़ना चाहिए। शोधकर्ताओं का कहना है कि मां और बच्चे के वजन के बीच काफी जबरदस्त संबंध है।

सामान्य से कम वजन की मांओं के बच्चों के कम वजन का होने की आशंका काफी अधिक है। इन्हें स्मॉल जेस्टेशनल एज (एसजीए) बच्चे कहा जाता है। इसी तरह अत्यधिक वजन वाली मांओं के बच्चे भी अत्यधिक वजनी हो सकते हैं, जिन्हें लार्ज जेस्टेशनल एज (एलजीए) कहा जा सकता है। इस तरह के बच्चों में वयस्क होने पर हार्ट अटैक, हाईपरटेंशन, मोटापा और डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा काफी अधिक रहता है।

इनके मुकाबले सामान्य वजन वाले बच्चे आमतौर पर स्वस्थ रहते हैं। इस नतीजे पर पहुंचने के लिए डॉ.रोबिलार्ड ने 16.5 साल तक अध्ययन किया। यह अध्ययन हेलियान जर्नल में प्रकाशित हो चुका है।

 

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