दिन में इस वक्त पानी पीने की न करें गलती

 

अमृत की जगह करता है जहर का काम

जीवन दर्शन के ज्ञाता चाणक्य की नीतियों के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपनी जिंदगी में उनकी नीतियों का पालन करता है उसे कभी भी धोखा नहीं मिलता है।

अपनी नीतियों में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि इंसान को अपना जीवन किस तरह से व्यतीत करना चाहिये। जिंदगी में उतार-चढ़ाव का होना सामान्य है, लेकिन इन परिस्थितयों में चाणक्य की नीति का पालन करने वाला व्यक्ति कभी भी असफल नहीं होता है।

वैसे तो एक स्वस्थ शरीर के लिये दिन में 07 से 08 ग्लास पानी का सेवन करना चाहिये, लेकिन चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से बताना चाहा है कि दिन में किस समय पानी पीना उचित है और किस वक्त पानी का सेवन जहर के समान है। आइए हम आपको बताते हैं कि दिन में किस समय पानी पीने से इंसान को बचना चाहिये और क्यों?

चाणक्य कहते हैं कि : अर्जीणे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्म, भोजने भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम।

चाणक्य नीति के आठवें अध्याय के सातवें श्लोक में इस बात का वर्णन किया गया है कि भोजन करने के तुरंतबाद पानी पीने से बचना चाहिये। इस दौरान जो पानी का सेवन करता है वह विष पान करने के समान होता है। इसमें ऐसा बताया गया है कि खाना पचने के बाद ही पानी का सेवन करना उत्तम है। इसका मतलब यह है कि खाना खाने के 1 से 2 घंटे के बाद ही पानी पीने से वह शरीर के लिये अच्छा माना जाता है।

खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने से भोजन को पचने में परेशानी होती है जिससे आगे चलकर इंसान को पेट से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खाना पूरी तरह से पचने के बाद ही पानी का सेवन अमृत के समान होता है। इससे शरीर को शक्ति मिलती है और पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है।

जो व्यक्ति इस नीति का पालन करता है वह आजीवन स्वस्थ बना रहता है और किसी प्रकार की समस्या का सामना उसे नहीं करना पड़ता है।

(साई फीचर्स)

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