जानें, हार्ट अटैक और हार्ट फेलिअर में क्या है अंतर!

ज्यादातर लोग हार्ट फेलिअर और हार्ट अटैक को एक ही समझते हैं। भले ही दोनों दिल से जुड़ी हुई जानलेवा स्थिति है, लेकिन दोनों में काफी फर्क है। आईये, जानते हैं कैसे एक-दूसरे से अलग हैं हार्ट अटैक और हार्ट फेलिअर..

कारण में अंतर : चिकित्सकों के अनुसार हार्ट अटैक बल्ड क्लॉट (खून का जमना) की वजह से होता है, जो कॉरेनरी आर्टरीज (खून की नलियां) में होता है। ब्लड क्लॉट के कारण खून के बहने में रुकावट आ जाती है, जिससे दिल तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है।

वहीं, हार्ट फेलिअर का कोई एक अकेला कारण नहीं है। यह अलग – अलग बीमारियों के कारण हो सकता है। कॉरेनरी आर्टरी डीसीज, डायबिटीज मेलिट्स, हाईपरटेंशन, अरिदमिया और दिल की अन्य बीमारियों के कारण हो सकता है।

लक्षण में अंतर : जानकारों की मानें तो हार्ट अटैक होने की स्थिति में मरीज को सीने में दर्द और जलन, हाथ, गले और जबड़े में दर्द होता है। इसके अलावा उसे साँस लेने में तकलीफ, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है। हार्ट फेलिअर के लक्षण लंबे समय में उभरते हैं। फेफड़ों में कंजेशन, एड़ियों, पैर या पेट में सूजन, असामान्य तरीके से वजन बढ़ना, भूख में कमी, साँस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण हार्ट फेलिअर के हैं।

इलाज में अंतर : जानकार बताते हैं कि हार्ट अटैक के बाद दिल को सामान्य बनाया जा सकता है। इसके लिये आर्टरी से ब्लॉकेज को हटाना होता है। वहीं, हार्ट फेलिअर के बाद दिल की स्थिति में दिल को सामान्य बनाना मुश्किल काम है। हालांकि, इसमें जीवनशैली में बदलाव करके, दवाइयां और ऑपरेशन से सुधार करने की कोशिश की जा सकती है।

(साई फीचर्स)

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