कब उठेगा इन हत्याओं पर से पर्दा

 

(शरद खरे)

सिवनी में एक के बाद एक शव मिलने की घटनाओं से अनेक प्रश्न उपज रहे हैं। इन शवों की शिनाख्त नहीं होने से यही आशंका बलवती हो रही है कि बाहर के जिलों से हत्या कर शवों को सिवनी जिले में फेंका जा रहा है। क्षत विक्षत हालत में मिले शवों की शिनाख्त न होना भी अपने आप में अहम माना जा सकता है।

हाल ही में धूमा थानांतर्गत एक युवती (संभवतः नाबालिग) का शव जिस हाल में मिला वह शोध का ही विषय है। युवती के कंधे और गले में दुपट्टा या अन्य किसी तरह का कपड़ा बंधा हुआ था और उसके मुँह में कंकड़ पत्थर भरे हुए थे। यह युवती दुष्कर्म का शिकार हुई अथवा नहीं इस बारे में अभी कहा नहीं जा सकता है।

इसके पहले भी अनेक शव मिले हैं जिनकी शिनाख्त नहीं हुई है। इसी साल अगस्त माह में छपारा थानांतर्गत क्षेत्र में अज्ञात शव मिले थे। भीमगढ़ रोड स्थित एक वेयर हाऊस के सामने अधेड़ का शव मिला था। इस मामले में आरोपी तो पकड़ा गया किन्तु शव की शिनाख्त अब तक नहीं हो पायी है।

इसी तरह छपारा थानांतर्गत लकवा ग्राम एवं बैनगंगा नदी में भी जुलाई माह में अज्ञात शव मिले थे जिनकी शिनाख्त नहीं हो पायी है। इसके अलावा और भी इस तरह के मामले हैं जिनमें शिनाख्त नहीं हो सकी है। 20 दिसंबर 2014 को कुरई घाट पर मिले शव के बारे में भी अब तक किसी तरह का सुराग नहीं मिलना आश्चर्य जनक ही माना जायेगा।

निश्चित तौर पर इस तरह की हत्याओं के मामले में पुलिस के द्वारा आसपास के जिलों में इस बात की दरयाफ्त अवश्य की गयी होगी कि इन जिलों मेें मृतकों के हुलिये से मिलते जुलते कद काठी वालों की गुमइंसान रिपोर्ट तो दर्ज नहीं है। बिना किसी कड़ी के इन हत्याओं में शिनाख्त कर पाना भी टेड़ी खीर ही साबित हो रहा है।

आज के संचार क्रांति के युग में सब कुछ संभव है। जिला पुलिस अधीक्षक विवेक राज सिंह से अपेक्षा की जा सकती है कि वे ही प्रदेश और देश के गृह मंत्रालय को इस आशय का एक पत्र अवश्य लिखें जिसमें गुम इंसान (गुमशुदा) की सूचनाओं को एक सूत्र में पिरोया जा सके।

परिवहन विभाग में जिस तरह वाहन का नंबर डालने पर वाहन के स्वामी सहित सारा विवरण एक क्लिक पर होता है, उसी तर्ज पर गुम इंसान मामलों में गुमशुदा की फोटो और विवरण अगर अंकित हो जाये तो इससे पुलिस को अज्ञात शवों के मिलने पर एक क्लिक में जानकारी मिलने से काफी आसानी हो सकती है। इसके साथ ही यह भी हो सकता है कि सिवनी पुलिस की यह पहल देश में नज़ीर बन जाये।

बहरहाल, जिला पुलिस अधीक्षक से जनापेक्षा है कि बाहर से आकर सिवनी में रहने वाले लोगों के मामले में किरायेदारी सत्यापन आदि की कार्यवाही को अनिवार्य रूप से लागू किया जाये। होता यह आया है कि अधिकारियों के द्वारा आदेश तो दे दिये जाते हैं पर उनका पालन हो रहा है अथवा नहीं इस बारे में देखने सुनने की फुर्सत किसी को नहीं होती है।

बाहर से आकर सड़क किनारे पंचर बनाने वाले, घूम-घूम कर वस्तुओं का विक्रय करने वाले, व्यवसायिक वाहन चालकों, ठेकेदारों के पास बाहर से आकर काम करने वालों आदि का चरित्र सत्यापन भी उनके निवास स्थान वाले थाने से करवाना अगर अनिवार्य कर दिया जाये तो इससे पुलिस का काम काफी हद तक आसान भी हो सकता है।

 

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