बिना परमिट दौड़तीं यात्री बस!

 

(शरद खरे)

जिले की सड़कों का सीना रौंदकर अनगिनत ऐसी यात्री बस जिले के विभिन्न इलाकों से सवारियां भर रहीं है जिनके पास जगह-जगह सवारियां भरने की वैध अनुज्ञा (परमिट) नहीं है। इसके बाद भी परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की नजरें इन पर इनायत न हो पाना आश्चर्य का ही विषय माना जायेगा।

देखा जाये तो अवैध यात्री बसों का संचालन सत्तर के दशक के पूर्वार्द्ध में आरंभ हो गया था। उस समय राज्य सड़क परिवहन निगम (सपनि) का अस्तित्व पूरे शवाब पर था और उस दौर में तारा ट्रेवल्स की नागपुर से इलाहाबाद यात्री बस का संचालन निजि तौर पर पर्यटक परमिट पर होता था।

कालांतर में इसी तरह की यात्री बस के संचालन से राज्य परिवहन की आर्थिक हालत जर्जर हो गयी और मजबूरी में सपनि का संचालन बंद कर दिया गया। सपनि के संचालन के बंद होने के बाद निजि बस संचालकों पर किसी का कोई जोर नहीं बचा है। सिवनी से होकर रोजाना सैकड़ों की तादाद में यात्री बस गुजर रही हैं। किसी भी सरकारी नुमाईंदे को इस बात की चिंता नहीं है कि वह इन बसों को रोककर इनसे कागजात पूछें। नतीजा यह है कि बस संचालकों की गुण्डागर्दी चरम पर है।

सिवनी में अवैध यात्री बस संचालन पूरे जोर-शोर से जारी है। बीते सालों में सोशल नेट वर्किंग वेब साईट पर अवैध यात्री बस के नंबर भी डाले गये पर न तो यातायात पुलिस और न ही परिवहन विभाग ने इस बाबत संज्ञान लिया। मजे की बात तो यह है कि यातायात थाना और परिवहन विभाग के कार्यालय नगझर में आसपास ही हैं। वे चाहें तो वहीं रोककर इन बसों की चैकिंग कर सकते हैं। विडंबना ही कही जायेगी कि यह काम शायद सालों से नहीं हो पाया है।

याद पड़ता है कि सालों पहले यातायात पुलिस या परिवहन विभाग द्वारा जिला न्यायालय के किसी माननीय न्यायाधीश को साथ लेकर वाहनों की चैकिंग की जाती थी। इससे पारदर्शिता बनी रहती थी, पता नहीं यह काम क्यों बंद कर दिया गया है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के द्वारा अगर आज भी ईमानदारी के साथ सिवनी से होकर या सिवनी से ही संचालित होने वाली यात्री बसों की चैकिंग कर ली जाये तो आधी से ज्यादा यात्री बस, अवैध की श्रेणी में आकर खड़ी हो जायेंगी।

यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के द्वारा अगर ऐसा किया जाता है तो निश्चित तौर पर इससे प्रदेश सरकार के राजस्व में बढ़ौत्तरी के साथ ही साथ गलत कार्यों पर रोक लग सकेगी। इसके लिये जिला प्रशासन को ही कदम उठाने होंगे क्योंकि, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग तो अपनी जवाबदारी भूलता ही दिख रहा है।

हाल ही में परिवहन विभाग के द्वारा औचक निरीक्षण में बिना परिमिट की एक यात्री बस को भी पकड़ा गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया में हाल ही में तीज त्यौहार पर अधिक किराया वसूले जाने की बात भी कही गयी है। इस संबंध में प्रमाण सहित शिकायतें भी पूर्व में की जा चुकी हैं।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड और जिला पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार से जनापेक्षा है कि शासन के नियम कायदों को रौंदकर बेधड़क चलने वाली अवैध यात्री बसों पर अंकुश लगाने के लिये यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के साथ ही साथ संबंधित थानों को भी निर्देश जारी करें ताकि इस तरह की अराजकता पर विराम लगाया जा सके।

 

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