अवैध शराब पर आबकारी का मौन

 

(शरद खरे)

जिले भर में जब चाहे तब पुलिस के द्वारा मुखबिर की सूचना पर अवैध रूप से बेची जाने वाली शराब पकड़ने की खबरें आये दिन अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं। इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि जिले में अवैध रूप से शराब बेचे जाने की कवायद जमकर जारी है।

देखा जाये तो आजादी के बाद हाकिमों के द्वारा केंद्र और प्रदेश में हर मामले के लिये अलग-अलग विभागों का गठन कर उनके जिम्मे अपने-अपने विभाग की निर्धारित कार्यप्रणाली का पालन कराने की महती जवाबदेही डाली गयी थी। आजादी के बाद विभागों के द्वारा मुस्तैदी से अपने-अपने कार्यों को अंजाम दिया जाता रहा किन्तु नब्बे के दशक के आरंभ होने के बाद से विभागों में तैनात मैदानी अधिकारियों में नैतिकता का अभाव साफ दिखायी देने लगा।

इस लिहाज से कानून और व्यवस्था बनाये रखना और नागरिकों के जान माल की जवाबदेही पुलिस पर तो अवैध शराब रोकने की जवाबदेही आबकारी विभाग के कांधों पर आती है। आबकारी विभाग के पास पर्याप्त अमला है। गाहे बेगाहे वे शराब ठेकेदारों के वाहनों में बैठकर भी अवैध शराब पकड़ने की कार्यवाही को अंजाम देते दिख जाते हैं।

एक दशक पहले तक अखबारों में आबकारी विभाग की सख्त कार्यवाहियों के तौर पर महुआ लहान और विदेशी शराब जप्त करने की खबरें देखने को मिल जाया करती थीं, किन्तु लगभग एक दशक से आबकारी विभाग का मुख्य कार्य शायद आबकारी ठेकों को मार्च माह में संपादित करना ही दिख रहा है।

याद नहीं पड़ता जब आबाकारी विभाग के मुलाजिमों के द्वारा भारी मात्रा में देशी या विदेशी मदिरा की तस्करी को पकड़ा गया हो। जिले भर में जब-तब पुलिस के द्वारा ही अवैध शराब पकड़ने की खबरें मिलती रहती हैं। अवैध रूप से पकड़ी गयी शराब की बोतलों पर बैच नंबर आदि भी होते हैं जिससे यह बात आसानी से पता की जा सकती है कि शराब को किस ठेकेदार के पास से ले जाकर बेचा जा रहा है।

अगर बैच नंबर नहीं है तो यह शराब आखिर अवैध शराब बेचने वालों के पास कहाँ से आ गयी? जिले के अनेक होटल ढाबों में जिस तरह से शराब परोसी जा रही है उसे देखकर लगता है मानो आबकारी विभाग के द्वारा होटल ढाबों को बियर बार का परमिट प्रदाय कर दिया गया हो।

संवेदनशील जिला कलेक्टर धनराजू एस. से जनापेक्षा है कि अब तक पकड़ी गयी अवैध शराब के बैच नंबर से इस बात की दरयाफ्त अवश्य की जाये कि वह शराब किस ठेकेदार की थी? इतनी ज्यादा तादाद में शराब ठेकेदार के द्वारा शराब किसे दी गयी थी? इसके साथ ही साथ आबकारी विभाग के आला अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित किया जाना आवश्यक है।

 

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