अवैध शराब और आबकारी विभाग

 

(शरद खरे)

सिवनी में अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है। जब चाहे तब पुलिस के द्वारा देशी-विदेशी अवैध शराब को पकड़ने की खबरें मिल रहीं हैं। आबकारी विभाग की तंद्रा अभी टूटी नहीं है। आबकारी विभाग का पूरा का पूरा ध्यान कच्ची शराब की ओर ही दिख रहा है। आबकरी विभाग के द्वारा कच्ची शराब और लहान की जप्ति बनाकर अपनी पीठ ठोकी जा रही है।

सिवनी शहर में हॉटल और ढाबों में इन दिनों अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है। ऐसा नहीं है कि यह बात पुलिस या आबकारी अमले के संज्ञान में नहीं है। दोनों ही जिम्मेदार विभाग के कर्मचारी अनेकों बार वर्दी में ही इन ढाबों और हॉटलों में सोडे की डकारें और धुंए के छल्ले बनाते दिख जाते हैं।

देशी और विदेशी शराब अब तक बड़ी तादाद में पुलिस के द्वारा ही पकड़े जाने की बातें मीडिया में सामने आती रही हैं। यह शोध का ही विषय है कि आखिर आबकारी विभाग के मूल काम को पुलिस के द्वारा अंजाम दिया जा रहा है और आबकारी विभाग नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहा है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय होगा कि अवैध शराब के बारे में सांसद-विधायकों को कोई लेना-देना नहीं है। सिर्फ और सिर्फ स्थानीय विधायक दिनेश राय द्वारा एकाध बार ही अवैध शराब के बारे में प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया था। बावजूद इसके आबकारी विभाग के कानों में जूं नहीं रेंग पा रही है।

शराब सामाजिक बुराई है, यह बात सिद्ध हो चुकी है। शराब से प्राप्त होने वाले भारी भरकम राजस्व से प्रदेश सरकार द्वारा अनेक योजनाएं विशेषकर शिक्षा विभाग का स्थापना व्यय निकाला जाता है। इसलिये शराब बंदी अब संभव प्रतीत नहीं होती है। यक्ष प्रश्न यह है कि अवैध शराब के जरिये कौन सा राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है?

आज भी शाम ढलते ही शहर में मयजदों की टोलियां लहराती हुईं दिखायी दे जाती हैं। चौक-चौराहों, अण्डों के ठेलों आदि पर मयजदों को डकारें मारते आसानी से देखा जा सकता है। जिला मुख्यालय में शाम ढलने के बाद कोतवाली पुलिस की पेट्रोलिंग भी अब दिखायी नहीं पड़ती।

जिले का शायद ही कोई ऐसा ढाबा हो जिसमें शराब अवैध रूप से न बिक रही हो या जिस ढाबे में दिन या रात में सुरापान करते हुए लोगों को न देखा जाता हो। यक्ष प्रश्न यही है कि इस तरह से अगर बिना किसी लाईसेंस के ढाबों में शराब परोसी जा रही है तो इस नियम विरूद्ध काम को आबकारी विभाग रोकने की कवायाद क्यों नहीं करता है!

बताते हैं कि जिले में सूखा नशा भी युवाओं के मुँह लग चुका है। सूखा नशा मतलब शराब, गांजा, भांग को छोड़कर अन्य वे चीजें जिनको नशे के लिये प्रयोग में लाया जाता है।

नवागत जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि हॉटल, ढाबों सहित अन्य स्थानों पर बिक रही अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिये आबकारी विभाग को पाबंद किया जाये ताकि लोगों के घर बच सकें। साथ ही अगर कभी मिलावटी या जहरीली शराब किसी ने बेची और कहीं कोई हादसा हुआ तो यह नया सिरदर्द प्रशासन के सिर ही होगा।

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