वाहनों में ना-ना प्रकार की लाईट्स का उपयोग क्या सही है

 

 

मुझे शिकायत ऐसे वाहन चालकों से है जिनके द्वारा अपने वाहनों में अजीबो-गरीब लाईट का उपयोग करके यातायात में व्यवधान उत्पन्न करने की कोशिश की जा रही है। ऐसी लाईट्स सामने वाले की आँखों में चकाचौंध लाती हैं। कई वाहन चालक तो रात के समय में शहर के अंदर भी हेड लाईट को अपर की स्थिति में रखकर वाहन का चालन करते हैं। इसके चलते सामने से आने वाले कई वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शहर में सघन यातायात वाले स्थानों पर वाहन चालकों को रात के समय यह ध्यान रखना चाहिये कि उनके वाहन की हेड लाईट की रोशनी सामने वाले वाहन चालक की आँखों में सीधी पड़कर, उनके लिये वाहन चालन में परेशानी न उत्पन्न कर रही हो क्योंकि इससे दुर्घटना की आशंकाएं कई गुना बढ़ जाती हैं।

यातायात विभाग के साथ ही साथ परिवहन विभाग की निष्क्रियता के चलते इन दिनों कई वाहन ऐसे चल रहे हैं जिन्होंने अपने-अपने वाहनों में अनावश्यक रूप से विभिन्न तरह की लाईट्स लगा रखी हैं। ऐसी लाईट की रोशनी सामने वाले वाहन चालक की आँखों में कई बार चकाचौंध की स्थिति बनाती हैं और यह स्थिति भी दुर्घटना के लिये पर्याप्त कारण मानी जा सकती है।

देखने वाली बात यह है कि इन दिनों विभिन्न वाहनों में ना-ना प्रकार की लाईट्स के साथ ही साथ विभिन्न प्रकार की आवाज निकालते हॉर्न भी लगे हुए हैं। हॉर्न ही नहीं कई मोटर साईकिल्स में तो साईलेंसर भी इस तरह के लगे हैं जिनसे फायर की आवाज निकलती है। ऐसे वाहन पूरे शहर में धमाचौकड़ी मचाते हुए सहज ही देखे जा सकते हैं लेकिन पुलिस की नजरों में इन वाहनों का न चढ़ना आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है।

पुलिस की नजरों से ऐसे वाहनों का बचना इसलिये आश्चर्यजनक कहा जा सकता है क्योंकि ऐसे ही ज्यादातर वाहन हैं जो शहर में छेड़छाड़ की घटनाओं में लिप्त रहते हैं। ऐसे वाहनों पर सवार ज्यादातर युवा शहर में युवतियों को उन्हें कई-कई तरह से परेशान करने से बाज नहीं आते हैं। पुलिस शायद इस बात का इंतजार करती दिखती है कि परेशान होने वाली युवतियां थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करायें और तभी संबंधित के खिलाफ कोई कार्यवाही पुलिस के द्वारा की जायेगी।

यदि पुलिस की इस तरह की कार्यप्रणाली है तो छेड़छाड़ की घटनाओं पर कैसे अंकुश लगाया जा सकेगा, यह पुलिस से बेहतर शायद ही कोई जानता होगा, यह बात शहरवासी तो नहीं समझ पा रहा है। वास्तव में छेड़छाड़ की जब छोटी-छोटी घटनाओं के कारकों पर अंकुश लगाया जायेगा तभी इस तरह की बड़ी घटनाओं से बचा जा सकेगा।

यह स्पष्ट रूप से पुलिस को साबित करना होगा कि वह वास्तव में छेड़छाड़ की घटनाएं रोकने के प्रति गंभीर है। इसके लिये सिर्फ हेल्मेट से संबंधित ही चालानी कार्यवाही न की जाये बल्कि ऐसे वाहन चालकों पर भी कार्यवाही की जाये जिन्होंने नियम विरूद्ध तरीके से अपने वाहन का रूपांतरण करवा लिया है और वे सिरदर्द बने हुए हैं शहर वासियों के लिये ।

अनिमेष गढ़पाले

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