परेशानी का सबब बने कर्कश स्वर में किये जा रहे प्रचार!

 

 

मुझे शिकायत ऐसे प्रचार से है जिसके तहत कानफोड़ू स्वर में अपील की जाती है और या बस स्टैण्ड जैसे स्थानों पर बसों के आने-जाने की जानकारियां दी जाती हैं।

इन दिनों चुनाव का मौसम है और प्रत्याशियों के द्वारा या प्रत्याशियों के लिये ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है। कई मर्तबा ये ध्वनि विस्तारक यंत्र ही घटिया होते हैं अथवा कई मौकों पर उन यंत्रों का उपयोग करने वाले लोग इतनी कर्कश आवाज में चुनाव प्रचार करते हैं कि लोग उनकी आवाज से परेशान हो जाते हैं। इस स्तंभ के माध्यम से मैं उम्मीदवारों को सलाह देना चाहता हूँ कि यदि उनके द्वारा या उनके लिये कानफोड़ू आवाज में प्रचार करवाया जायेगा तो वह जीरो प्रचार की श्रेणी में ही आयेगा क्योंकि ऐसे कर्कश प्रचार की ओर मतदाता ध्यान न देना ही बेहतर समझते हैं।

इसी तरह बस स्टैण्ड पर चौबीसों घण्टे ही बसों के आवागमन की घोषणाएं अत्यंत तेज स्वर में जारी रहती हैं। इनके वॉल्यूम के कारण आसपास के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रात के समय तो बस स्टैण्ड से निकलने वाली इस आवाज को बारापत्थर के साथ ही साथ कटंगी नाका और नागपुर नाका जैसे सीमांत क्षेत्रों में भी सहज ही सुना जा सकता है।

देखने वाली बात यह है कि बस स्टैण्ड के आसपास के क्षेत्र में कई धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। इन धार्मिक स्थलों में जब किसी तरह के कोई धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे होते हैं तब भी बस स्टैण्ड से घोषणाएं पूरे वॉल्यूम के साथ जारी रहती हैं जिनसे विध्न उत्पन्न होता है। यही नहीं बल्कि इस क्षेत्र के आसपास ही ऐसे हजारों लोग निवास करते हैं जिन्हें इन घोषणाओं से कोई सरोकार नहीं रहता है लेकिन उनके कानों में ये कर्कश ध्वनि सुनायी पड़ना उनकी मजबूरी ही रहती है।

यहाँ निवासरत लोगों में कई विद्यार्थी भी शामिल हैं जिनके अध्ययन कार्य में, रह-रह कर होने वालीं ये घोषणाएं बाधा डालने का काम करती हैं। थोड़े-थोड़े अंतराल में कानफोड़ू स्वरों में आने वाली ये आवाजें विद्यार्थियों की उस एकाग्रता को भंग करने का पर्याप्त कारण बनतीं हैं जो अध्ययन कार्य में लिप्त विद्यार्थी के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नियमानुसार एक नियंत्रित डेसीबिल पर ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है लेकिन ऐसा लगता है कि बस स्टैण्ड में उपयोग में लाये जाने वाले लाउड स्पीकर के ऊपर ये नियम लागू नहीं होता है। लोगों की परेशानी का एक कारण यह भी है कि इस लाउड स्पीकर का उपयोग करने के लिये किसी जिम्मेदार को यहाँ नियुक्त नहीं किया गया है इसके चलते जिसके मन में आता है वह माईक पकड़कर अपने ही अंदाज में एनाउंसमेंट करना आरंभ कर देता है।

इस तरह की कार्यप्रणाली को नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता है। यदि एनाउंसमेंट करना इतना ही आवश्यक है तो लाउड स्पीकर का वॉल्यूम इतना ही रखा जाना चाहिये कि उसकी आवाज अनावश्यक रूप से बस स्टैण्ड परिसर के बाहर न जाये। वैसे भी सिवनी से महत्वपूर्ण दिशाओं की ओर जाने वाली बसें अत्यंत सूक्ष्म अंतराल में मुहैया हो जाती हैं इसलिये ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता कि बस स्टैण्ड में लगे लाउड स्पीकर का उपयोग हजारों लोगों की दुविधा का कारण बनाये जायें।

समीर सम्मू

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