देर रात शहर के बाहर छोड़ रहीं यात्री बसें यात्रियों को

 

 

मुझे शिकायत प्रशासन के द्वारा बनायी गयी उस व्यवस्था से है जिसके तहत यात्री बसों को नवरात्रि के इन दिनों में शहर से बाहर ही रोका जा रहा है।

शहर के बाहर ही बसों को रोकने के कारण यात्रियों विशेषकर इनमें शामिल महिलाओं को अच्छी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि प्रशासन के द्वारा शहर के बाहर ही बसों को रोका जाना था और शहर में प्रवेश के लिये कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाना था तो कम से कम इन मार्गों पर पुलिस की व्यवस्था ही तगड़ी कर दी जाती ताकि महिलाएं देर रात को शहर में निडर होकर प्रवेश कर सकें।

प्रशासन को चाहिये था कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमीं तिथि पर बसों को रात 12 बजे के बाद शहर में प्रवेश करने दिया जाता। इसके पीछे कारण यही है कि रात 12 बजे के बाद प्रतिमा दर्शन को निकली श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद छंट जा रही थी। ऐसे में रात 12 बजे के बाद यात्री बसों को शहर के बाहर ही रोका जाना इसलिये भी आश्चर्यजनक है क्योंकि ये बसें इससे ज्यादा भीड़ की उपस्थिति में बारह महीने ही शहर में प्रवेश करती आयीं हैं और प्रशासन के द्वारा इतनी गंभीरता बारह महीने नहीं दिखायी जाती है।

बस स्थानक को यदि हमेशा के लिये ही शहर के बाहर कर दिया जाये तो कहा जा सकता है कि प्रशासन शहर वासियों के प्रति गंभीर है लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। शहर के बाहर बस स्थानक चला जायेगा तो देर रात के लिये भी शहर में प्रवेश के लिये अन्य साधनों की व्यवस्था वहाँ स्थायी रूप से बन जायेगी जिसके कारण इन दिनों बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। अपेक्षा यही है कि प्रशासन इस विषय पर गंभीरता के साथ विचार करके कोई बेहतर हल अवश्य निकालेगा।

दिनेश वास्त्री

 

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