श्रेय लेने का प्रयास किया गया तो पिट सकती है नगर पालिका की भद!

 

 

ज्यारत नाका से नागपुर नाका तक शहर के अंदर बनायी गयी मॉडल रोड का नामकरण क्यों नहीं किया जा रहा है, इस स्तंभ के माध्यम से मैं नगर पालिका से यही जानना चाहता हूँ।

मॉडल रोड यदि वास्तव में नगर पालिका के द्वारा किया गया ऐसा कार्य है जिसे सिवनी की शान कहा जा सकता है तो इस मार्ग पर मॉडल रोड लिखे हुए बोर्ड भी दृष्टिगोचर होना चाहिये ताकि अन्य शहरों से आकर सिवनी के इस मार्ग से गुजर रहे मेहमानों को यह पता चल सके कि गड्ढों से युक्त जिस मार्ग से वे गुजर रहे हैं वह वास्तव में नगर पालिका सिवनी के द्वारा बनवायी गयी मॉडल रोड है।

रात के समय बाहर से आये मेहमान यात्रियों को यह पता चलना चाहिये कि जिस अंधेरी रोड (जहाँ स्ट्रीट लाईट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है) से वे गुजर रहे हैं उसका निर्माण नगर पालिका के द्वारा किया गया है और इसे कागजों में मॉडल रोड का दर्जा दिया गया है। लोगों को पता चलना चाहिये कि जिस मार्ग पर जगह – जगह डिवाईडर्स अनाप शनाप तरीके से बनवाये गये हैं वह नगर पालिका सिवनी की मॉडल रोड है।

वाहन चलाते समय यदि वाहन लहराये और उक्त वाहन के चालक के साथ ही उस वाहन में सवार मेहमान यात्रियों का ध्यान सड़क की परत पर जाये तो उन्हें मालूम चलना चाहिये कि जिस मार्ग से वे गुजर रहे हैं और जिस पर डामर की परत ही पूरी तरह दोषपूर्ण तरीके से बिछायी गयी है वह वास्तव में नगर पालिका सिवनी के द्वारा बनवायी गयी मॉडल रोड है।

मॉडल रोड का कोई बोर्ड नजर न आने के कारण बाहरी यात्रियों को यह पता ही नहीं चलता है कि वे सिवनी में किस मार्ग से गुजर रहे हैं। वैसे संभावना यही है कि नगर पालिका के द्वारा इस तरह का कोई बोर्ड शायद नहीं लगवाया जायेगा क्योंकि श्रेय लेने का जो प्रयास उसके द्वारा किया जा सकता है वह उसकी भद भी पिटवा सकता है।

मंसूर नकवी

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