सुप्रीम कोर्ट से अनिल अंबानी को एक दिन में 2 राहत

 

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली (साई)। कर्ज के बोझ में दबी कंपनी रिलायंस के मालिक अनिल अंबानी के लिए शुक्रवार का दिन उम्मीद की नई किरणें लेकर आया। एक ही दिन में उन्हें दो बड़ी राहतें मिलीं। खास बात यह है कि दोनों ही खुशियांउन्हें सुप्रीम कोर्ट में मिलीं।

पिछले कुछ समय से वह सरकार और कांग्रेस के बीच राफेल डील के आरोप-प्रत्यारोप में घसीटे जा रहे थे तो दूसरी तरफ उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन एक बार फिर दिवालियापन में प्रवेश करने के कगार पर थी। इन दोनों ही मुसीबतों से उन्हें राहत मिल गई है।

राफेल पर राहत

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील को लेकर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ऑफसेट पार्टनर के लिए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस का पक्ष लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेबुनियाद करार दे दिया।

अनिल ने क्या कहा?

अनिल अंबानी ने कई अरब डॉलर के राफेल जेट सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे यह साबित हो गया कि उनकी कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित और गलत थे। सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर दिए अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद के सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

अंबानी ने एक बयान में कहा, ‘मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदे को लेकर दायर की गई जनहित याचिकाओं को खारिज करने के आज के फैसले का स्वागत करता हूं। इससे यह साबित हो गया कि निजी तौर पर मुझ पर और रिलायंस समूह पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से मिथ्या, बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित थे।

दूसरी राहत

अनिल अंबानी के लिए सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को ही एक और राहत आई। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आरकॉम के स्पेक्ट्रम सेल को सोमवार सुबह तक मंजूरी दे दी जाएगी। टेलिकॉम कंपनी के लिए यह एक बड़ी राहत है, जो इस हरी झंडी के बाद संपत्ति बेचकर कर्ज चुका पाएगी।

डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम्युनिकेशन (DoT) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि स्पेक्ट्रम बकाया के रूप में रिलायंस ग्रुप द्वारा दी गई 14 सौ करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट गारंटी को लेकर जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा था।

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