डाइट और व्यायाम पर रखती हूं नजर : राधिका आप्टे

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)
मुंबई (साई)। राधिका आप्टे सिनेमा जगत की वो कलाकार हैं, जिन्होंने कम समय में सिनेमा के कई मिथकों को तोड़ते हुए यहां अपने लिए खास जगह बनाई है। वह अपनी फिटनेस का भी खूब ध्यान रखती हैं। दिवाली के मौके पर उनकी फिटनेस और इस त्योहार के बारे में उनसे बातचीत की साक्षी त्रिपाठी ने

आप त्योहारों के बारे में क्या सोचती हैं?

त्योहार हमारे जीवन में उस खूबसूरत सपने की तरह होते हैं, जो ढेरों खुशियां लेकर आते हैं। इन त्योहारों के कारण हम अपनों के बीच पहुंच जाते हैं और वो हमारे साथ आकर त्योहार मनाते हैं। शायद इसीलिए त्योहारों में मीठा खाने और खिलाने का रिवाज है। यह प्रतीक है जीवन में मिठास का। मैं मानती हूं कि त्योहार खुशियों का प्रतीक हैं।

इससे रुटीन भी तो बदल जाता है?

इसकी वजह से रुटीन में थोड़ा बदलाव आता है, लेकिन वो आवश्यक भी होता है। ऐसे ब्रेक के बाद हम और ज्यादा ऊर्जा के साथ काम में जुट जाते हैं। दरअसल, हमेशा एक जैसा जीवन जीकर हम कई बार बोर होने लगते हैं, साथ ही काम के चक्कर में परिवार और दोस्तों को वक्त नहीं दे पाते। ऐसे में आने वाले ये रंग-बिरंगे त्योहार हमें एकदम अलग सा माहौल देकर ताजगी से भर देते हैं।

इन सबके बीच फिटनेस का ध्यान कैसे रखती हैं?

फिटनेस मेरे लिए जीवन की तरह है। जिस प्रकार जीवन के साथ ही हर चीज चलती है, उसी प्रकार फिटनेस के साथ बाकी सब कुछ जुड़ता चला जाता है। फिटनेस मेरे रुटीन का हिस्सा है। जैसे मैं हर दिन सुबह जागती हूं, सोती हूं, खाना खाती हूं, उसी प्रकार हर दिन व्यायाम करती हूं और डायट को फॉलो करती हूं। और जब त्योहार आते हैं तो जी भरकर त्योहार मनाती हूं। बस इस बात का ध्यान रखती हूं कि बाद में अतिरिक्त कैलोरी बर्न हो जाए। दूसरे दिन अपने डायट रुटीन में बदलाव करके सब कुछ पहले जैसा कर लेती हूं।

फिटनेस के लिए हमेशा मीठे से दूर रहने की सलाह दी जाती है?

मीठा सेहत के लिए नुकसानदेह होता है, इसलिए मना करते हैं। आजकल तो कई ऐसी मिठाइयां आती हैं, जिनमें शुगर ना के बराबर या बिल्कुल भी नहीं होता। कुछ मिठाइयां तो ऐसी भी होती हैं, जो फायदेमंद होती हैं। इसलिए अगर थोड़ा ध्यान रखा जाए तो हेल्दी मिठाइयों का विकल्प है, जिन्हें खाकर सेहत और खुशी दोनों अच्छे किए जा सकते हैं।

फिटनेस को ध्यान में रखते हुए आप किस प्रकार का बदलाव करती हैं?

इस दौरान फिटनेस के लिए जिम, व्यायाम और योग का खास ध्यान रखती हूं और इनके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करती। इसलिए सुबह उठकर सबसे पहले ये काम कर लेती हूं। उसके बाद घर में त्योहार के लिए होने वाली तैयारी में शामिल हो जाती हूं। डाइट में ध्यान रखती हूं कि कैलोरी की मात्रा कम हो। खूब ग्रीन टी पीती हूं, ताकि टॉक्सिन निकल जाएं। हल्का गरम पानी पीती हूं और पहले की दिनचर्या में आ जाती हूं।

आप इस त्योहार को किस प्रकार मनाती हैं?

हमारे यहां तो दिवाली की तैयारी तकरीबन महीनेभर पहले से शुरू हो जाती है। शुरुआत घर की साफ-सफाई से ही होती है। इस दिन सुबह उठकर मैं रंगोली बनाती हूं, क्योंकि मुझे दरवाजे के बाहर रंगोली बनाना बहुत पसंद है। खाने में मैं अपने हाथ से कुछ ना कुछ मीठा जरूर बनाती हूं।

दिवाली कैसी लगती है?

दिवाली का त्योहार बहुत ही खास होता है। कहते हैं, इस दिन भगवान श्रीराम अपने घर अयोध्या वापस आए थे, इसीलिए मेरे लिए भी यह त्योहार खुशियों को अपने घर लाने वाला त्योहार है। मुझे यह त्योहार बहुत अच्छा लगता है। और इस दिन होने वाली रोशनी तो मानो दिल को रोशन कर देती है।

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