इस अंगूठी का शनि देव से क्या है संबंध!

शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। जो जैसा कर्म करता है शनिदेव एक न्यायाधीश की तरह ही उसे दण्ड या लाभ प्रदान करते हैं। कई बार कुण्डली में शनि की महादशा और अन्तर्दशा चलने के कारण व्यक्ति को काफी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में उसके हर कार्य में विलंब होना, अकेलेपन का शिकार, लंबी बीमारी की समस्या जैसी दिक्कतें बार – बार सामने आती हैं। ऐसे में करंे तो क्या करें।
जैसा कि हम जानते हैं कि धातुओं का ग्रह से विशेष संबंध होता है। जिस ग्रह का जिन धातुओं पर आधिपत्य होता है उसे धारण करने से इंसान को लाभ पहुँचता है। शनि देव का आधिपत्य लौह धातु पर है। इसलिये शनि के दुष्प्रभावों और बुरी आत्माओं से बचने के लिये लोहे के छल्ले का उपयोग किया जाता है। शनि के छल्ले का उपयोग शनिदेव की शक्तियों को नियंत्रित करने के काम आता है।
हालांकि किसी भी सामान्य लोहे का छल्ला पहनने से कोई काम नहीं बनता है बल्कि घोड़े की नाल या नाव की कील की बनी हुई अंगूठी को ही धारण करना चाहिये। इससे शनि की पीड़ा काफी हद तक काफी हो जाती है। इसे धारण करने से व्यक्ति की जिंदगी में सुख – शान्ति का आगमन होना प्रारंभ हो जाता है।
इसे आप किसी भी दिन घर पर लायें। तत्पश्चात शनिवार के दिन सुबह के वक्त सरसों के तेल में इसे डुबोकर रख दें। शाम को इसे तेल से निकाल कर साफी पानी से धोकर अपने सामने रखें। इसके बाद ध्यानपूर्वक ऊँ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें।
अन्त में दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में इसे पहन लें। दाहिना हाथ इसलिये क्योंकि दाहिने हाथ की मध्यम उंगली के नीचे ही शनि पर्वत होता है। इस उपाय से जीवन में शनि का नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जायेगा और परेशानियों से कुछ ही समय के अंदर मुक्ति मिलेगी।
(साई फीचर्स)

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