इसलिये शुभ काम के पहले खिलाते हैं दही शक्कर!

 

परंपराओं और रीतियों का हमारे जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इन पर हमारा गहरा विश्वास है जिस वजह से हम इन्हें ना मानने या इंकार करने की गुस्ताखी नहीं करते हैं।

हालांकि आज की नयी पीढ़ी इनमें से कुछ चीजों को अंधविश्वास मानकर इनका पालन करने से कतराते हैं। जिनमें से कुछ हद तक सही भी है, लेकिन इसके साथ ही यह भी बता दें कि पहले के जमाने इन चीजों या नियमों को किसी खास मकसद से बनाया गया था। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इन्हें काफी हद तक सही माना गया है। एक ऐसी ही परंपरा के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिसे हम, आप सभी बचपन से मानते आ रहे हैं।

परीक्षा देने जाने से पहले या किसी शुभ काम के लिये निकलने से पहले दही शक्कर आप सभी ने खाया होगा। हिंदू धर्म में इस परंपरा का पालन काफी लंबे से होता आ रहा है। ऐसा माना जाता है कि दही शक्कर खाकर निकलने से काम अच्छा होता है। बिना किसी विघ्न के वह पूरा हो जाता है। अब सवाल यह आता है कि क्या वाकई में इसका कोई वैज्ञानिक आधार है या यूं ही इसे लोग मानते आ रहे हैं। आइए देखते हैं विज्ञान इस बारे में क्या कहता है?

जब इंसान किसी विशेष काम के लिये घर से बाहर निकलता है तो उसे दिनभर शारीरिक और मानसिक शक्ति की जरुरत पड़ती है। अगर बॉडी में एनर्जी ही ना हो तो व्यक्ति काम कैसे करेगा। ऐसे में सिर्फ एक कटोरी दही-शक्कर बॉडी में एनर्जी लेवल को दुगना कर देता है।

दिनभर भले ही वह कुछ खाए या ना खाए दही शक्कर से उसका काम चल जाता है। ऐसा इसलिये क्योंकि दही में प्रोटीन की अधिकता होती है। इसके अलावा दही में कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी6 और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व भी होते हैं, जो शरीर में एनर्जी लेवल बरकरार रखते हैं।

दही में शक्कर मिलाने से शरीर को ग्लूकोज मिलता है। इससे गर्मियों में डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है और कमजोरी का अनुभव भी नहीं होता है। इससे पेट सही रहता है। यानि कि दही और शक्कर का कॉम्बिनेशन बिल्कुल परफेक्ट है। यही वजह है कि किसी भी शुभ काम में निकलने से पहले दही और शक्कर खिलाने की परंपरा का पालन किया जाता रहा है।

(साई फीचर्स)

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