मूछ वाली राजकुमारी से लाख दीवाने

 

 

 

 

आज के जमाने में लड़कियां छरहरा फिगर पाने के लिए क्या कुछ नहीं करती हैं, जिम से लेकर डायटिंग और न जानें क्या-क्या क्योंकि वर्तमान समाज में हेल्दी नहीं बल्कि पतली लड़कियों को सुंदरता का दर्जा दिया जाता है। हालांकि यह भी सच है कि सुंदरता देखने वाले की आंखों में होती है।

आज हम आपको एक ऐसी राजकुमारी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे उस वक्त के लोग बेहद हसीन और खूबसूरत मानते थे और तो और उनके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे।

हैरान करने वाली बात तो यह थी कि दिखने में वह राजकुमारी बिल्कुल भी आकर्षक नहीं थी इसके बावजूद लोगों ने उन्हें खूबसूरती का ताज पहनाया।

हम यहां कजर की राजकुमारी की बात कर रहे हैं। बता दें कजर वंश, तुर्किश मूल का ईरानी शाही वंश था। इस राजकुमारी का जन्म तेहरान में 1883 में हुआ था। उनका रंग गोरा था लेकिन, दिखने में वह बिल्कुल खूबसूरत नहीं थी। इस फारसी राजकुमारी का पूरा नाम जहरा खानम तदज एस-सल्टानेह था। हालांकि उनमें दो खूबियां थी और वह ये कि एक तो शाही वंश से ताल्लुक रखने के चलते वह बेहद अमीर थी और दूसरी बात यह थी कि वह उस समय इराक में सबसे शिक्षित महिलाओं में से एक थी।

राजकुमारी जब बड़ी हुई तो पुरुष उनकी ओर आकर्षित होने लगें। हद तो तब हो गई जब उनसे शादी के लिए 145 युवकों ने उनका हाथ मांगा और जब वह उन्हें नहीं मिली तो इनमें से 13 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। बाद में जहरा ने अपने प्रेमी फारसी राजा नासिर अल-दीन शाह काजर से शादी कर ली और 2 बेटे और 2 बेटियों को जन्म दिया।

राजा की भले ही 84 पत्नियां थीं लेकिन जहरा उनके सबसे करीब मानी जाती थीं। इस राजा से एक दफा एक विदेशी व्यापारी ने पूछा था कि यहां ज्यादा वजन की औरतों को सुंदर मानने के पीछे की वजह क्या है? इस सवाल के जवाब में नासिर ने कहा था कि जब हम कसाई के पास जाते हैं तो हड्डियों को खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं या गोश्त? इस तरह से उन्होंने अपनी सोच को उस व्यापारी के सामने रखा।

दरअसल, उनका ऐसा मानना था कि बाहरी खूबसूरती से ज्यादा इंसान का मन ज्यादा महत्व रखता था। जहरा के साथ भी कुछ ऐसा ही था। जहरा एक शिक्षित महिला होने के साथ-साथ चित्रकला में भी पारंगत थीं।

महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया था, इसके लिए जहरा ने सोसाइटी ऑफ वूमेन फ्रीडम नामक एक संस्था का निर्माण भी किया। बेहद साहसी और गुणकारी जहरा की इसी खूबसूरती के लोग कायल थे और उन्हें हमसफर बनाने की चाह रखते थे।

साल 1936 में जहरा का निधन हो गया लेकिन उन्होंने जमाने के सामने खूबसूरती की परिभाषा को बदल कर रख दिया। उनकी अदाओं और साहस पर लोग अपनी जान तक दांव पर लगाने का दम रखते थे।

(साई फीचर्स)

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *