पंछियों की भांति हम चले अपनों के बीच, अगले साल फिर आएंगे

 

(हरि मृदुल)

तीन महीने के प्रवास के बाद अब उनके जाने के दिन आ गए हैं। मुंबई को विदा कहते हुए ये प्रवासी तिब्बती उदास भी हैं और उल्लसित भी। उदास इसलिए हैं कि उनका तीन महीनों का ही सही, एक कारोबार समाप्त हो रहा है। जल्द ही वे अपनों के बीच पहुंचेंगे, यह उनके उल्लसित होने की वजह है। इन दोनों भावों की रेखाएं जब उनके चेहरों पर परस्पर मिल रही हैं, तो किसी लामा के मुख की आभा कौंध-कौंध जा रही है। मुंबई के सीएसएमटी स्टेशन के पास की डी.एन.रोड के किनारे नवंबर, दिसंबर और जनवरी में उन्हीं की वजह से खूब गहमागहमी रही। मुंबईकरों ने उनसे ऊनी स्वेटर, जैकेट, कार्डिगन, मोजे, मफलर और कैप आदि की जमकर खरीदारी की। कंबल और रजाइयां तक खरीदी गईं, आमतौर पर जिनकी मुंबईकरों को आवश्यकता नहीं पड़ती।

पटरी पर बैठे तेंजिन बड़ी कृतज्ञता के साथ कहते हैं, मुंबई हमारी मां की तरह है। तीन महीनों में हम इतना कमा लेते हैं कि छह महीने हमारा भली-भांति लालन-पालन हो जाता है। उन्हीं के बाजू में दुकान जमाए येशी का भी कहना है, हम हर साल ही यहां पंछियों की तरह आते हैं। थोड़ा दाना चुगते हैं, थोड़ा अपने घरवालों के लिए इकट्ठा करते हैं और फिर कर्नाटक के अपने रिफ्यूजी कैंपों के लिए निकल पड़ते हैं।

कितने ही वर्षों से ये प्रवासी तिब्बती मुंबई आ रहे हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन्होंने मुंबईकरों का विश्वास जीता है। मुंबई आनेवाले ज्यादातर प्रवासी तिब्बती कर्नाटक से आते हैं। इनमें कई बार नेपाली दुकानदार भी शामिल हो जाते हैं। बीएमसी से सिर्फ तीन महीने की ही अनुमति मिलती है व्यवसाय के लिए, लेकिन इन तीन महीनों में उनकी एक अलग ही दुनिया बस जाती है। मुंबई में वे पचास से ज्यादा वर्षों से डी.एन.रोड की पटरियों पर बैठते रहे हैं या फिर परेल नाके पर। पूरी ईमानदारी से व्यवसाय करते हैं। दिनभर की मेहनत के बाद रात में सभी जन एक-दूसरे से मिलते हैं और अपने अनुभव बांटते हैं। 10 दिसंबर उनके लिए काफी मायने रखता है- वजह यह है कि इस दिन ही दलाई लामा को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। इस दिन ये तिब्बती प्रवासी शारदा हॉल, दादर में जोरदार उत्सव मनाते हैं, मुंबई में बौद्ध धर्म की किसी हस्ती को विशिष्ट अतिथि बनाते हैं और सहभोज का आयोजन करते हैं।

इस साल लगभग सवा सौ प्रवासी तिब्बती मुंबई आए, जिसमें से अधिकांश लोग वापस लौट चुके हैं। जो गिने-चुने जन बचे हैं, वे भी पंद्रह फरवरी तक वापस चले जाएंगे। अगले साल ये लोग फिर आएंगे। नए डिजाइनों वाले स्वेटरों, जैकेटों, कार्डिगनों, मोजों, मफलरों और कैप के साथ। आप उनका इंतजार जरूर कीजिएगा।

(साई फीचर्स)

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